Vedant Samachar

कोरबा न्यूज़ : चलती ई-रिक्शा में महिला ने बच्चे को दिया जन्म परिजन बोले-नहीं पहुंची एम्बुलेंस…

Vedant Samachar
5 Min Read

कोरबा,20नवंबर (वेदांत समाचार) । छत्तीसगढ़ के कोरबा में महिला ने चलती ई-रिक्शा में बच्चे को जन्म दिया। एम्बुलेंस नहीं मिलने पर महिला को ई-रिक्शा से जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया जा रहा था। इस दौरान उसने रास्ते में नवजात को जन्म दिया। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ्य हैं।

परिजनों का आरोप है कि एम्बुलेंस (महतारी एक्सप्रेस- 102) को कॉल किया। लेकिन गाड़ी समय पर नहीं पहुंची। लेबर पेन भी बढ़ने लगा। ऐसे में महिला को ई-रिक्शा से लेकर पहुंचे। मितानिन पर भी लापरवाही का आरोप है। स्वास्थ्य अधिकारी ने जांच कर कार्रवाई की बात कही है।

वहीं, 4 दिन पहले अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के MCH वार्ड के टॉयलेट में एक गर्भवती महिला ने बच्चे को जन्म दिया। बच्चा कमोड में फंस गया। करीब 1 घंटे बाद टॉयलेट सीट तोड़कर बच्चे को बाहर निकाला गया। बच्चा सिर्फ 7 महीने का है और प्री-मैच्योर है।

जानकारी के मुताबिक महिला शौचालय गई थी। कमोड पर बैठते ही उसके पेट में दर्द हुआ और बच्चा उसके गर्भ से बाहर गिर गया। नवजात कमोड पर ही अटका रहा। जब महिला ने शोर मचाना शुरू किया, तो लोगों को पता चला और बच्चे को बचाया गया।

कोरबा मामले में पति बाबूलाल विश्वकर्मा पेशे से राज मिस्त्री है। वह परिवार के साथ अयोध्यापुरी दर्री में रहता है। उसके 2 बच्चे हैं। गुरुवार सुबह पत्नी सीमा विश्वकर्मा को लेबर पेन होने लगा। जिसके बाद उसे स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती करवाया। वहां मौजूद स्टाफ ने जांच के बाद बताया कि महिला में खून की कमी है।

प्रसव के दौरान दिक्कत हो सकती है, इसलिए उसे जिला मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दी। परिजनों ने महतारी एक्सप्रेस के लिए कॉल किया। काफी देर तक इंतजार के बाद एम्बुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। इसके बाद स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारी ने ई-रिक्शा चालक को कॉल कर बुलाया।

पति का कहना है कि मितानिन पत्नी की हालत देखकर मौके से अपने घर चली गई। मितानिन को बुलाने और कॉल करने के बावजूद वह उनके साथ जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल नहीं पहुंची।

महिला को ई-रिक्शा से अस्पताल ले जाया रहा था, इसी दौरान बुधवारी के पास महिला ने बच्चे को जन्म दिया। किसी तरह परिजन महिला को लेकर जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे। ई-रिक्शा गेट के पास खड़ी कर दी। फौरन प्रसूता और नवजात शिशु को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

इस पूरे मामले में जिला स्वास्थ्य अधिकारी एसएन केसरी ने बताया कि महिला ने ई-रिक्शा में नवजात को जन्म दिया है। उन्हें जिला कॉलेज अस्पताल भर्ती किया गया है। अगर मितानिन की ओर से लापरवाही की गई है तो उसकी जांच की जाएगी। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल, सूरजपुर जिले के प्रतापपुर की रहने वाली रामपति बाई करीब 7 महीने की प्रेग्नेंट थीं। 13 नवंबर को प्रसव पीड़ा होने पर महिला को परिजनों ने प्रतापपुर सीएचसी में भर्ती कराया। महिला की हालत गंभीर होने पर उसे मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर रेफर कर दिया गया।

महिला को मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एमसीएच अस्पताल के AMC-2 वार्ड में भर्ती किया गया था। शनिवार सुबह करीब 10:30 बजे प्रसूता टॉयलेट गई थी। इसी दौरान टॉयलेट में ही प्रसव हो गया। इसके बाद महिला ने शोर मचाना शुरू किया।

वहीं शोर सुनने के बाद वार्ड के नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टर मौके पर पहुंचे। इस दौरान पता चला कि महिला की डिलीवरी हो गई है। महिला से पूछताछ करने पर उसने बताया कि वह टॉयलेट करने गई थी। इसके बाद पता चला कि बच्चा कमोड में फंसा हुआ है।

टॉयलेट में महिला की डिलीवरी की जानकारी मिलते ही सफाई सुपरवाइजर आशीष साहू अपने सफाईकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। टॉयलेट सीट को तोड़कर करीब 1 घंटे बाद बच्चे को बाहर निकाला। बच्चा एक घंटे तक कमोड में फंसा रहा, लेकिन बच्चे की सांस चल रही थी।

मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टर्स के मुताबिक बच्चे को SNCU में वेंटिलेटर पर रखा गया है। रामपति बाई का यह दूसरा बच्चा है। बच्चा सिर्फ 7 महीने का है और प्री-मैच्योर है। डॉक्टर्स के मुताबिक कभी-कभी बैठने या पेट में दबाव पड़ने से बच्चा बाहर आ जाता है।

हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जेके रेलवानी ने बताया कि बच्चा प्री-मैच्योर है। प्रसूता खतरे से बाहर है, लेकिन बच्चे की हालत गंभीर है। बच्चे को वेंटिलेटर पर रखा गया है। डॉक्टर उसकी पूरी निगरानी कर रहे हैं।

Share This Article