शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए बुधवार, 19 नवंबर का दिन काफी हलचल भरा रहा, खासकर उन निवेशकों के लिए जिन्होंने हाल ही में लिस्ट हुई कंपनी ग्रो (Groww) पर दांव लगाया था. ग्रो की पैरेंट कंपनी, ‘बिलेनियर्स गैराज वेंचर्स लिमिटेड’ के शेयरों ने लिस्टिंग के बाद से जो रफ्तार पकड़ी थी, उस पर आज अचानक जोरदार ब्रेक लग गया है. पिछले छह दिनों से जो शेयर लगातार ऊपर भाग रहा था, उसने आज न सिर्फ यू-टर्न लिया, बल्कि स्थिति ऐसी बनी कि शेयर 10% टूटकर सीधे लोअर सर्किट पर जा लॉक हो गया.
‘लोअर सर्किट’ में फंस गया शेयर
बुधवार को जैसे ही बाजार खुला, ग्रो के शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला. देखते ही देखते शेयर का भाव 10 फीसदी लुढ़क गया और 169.89 रुपये के स्तर पर आ गया. यह गिरावट इतनी तेज थी कि शेयर ‘लोअर सर्किट’ में फंस गया. लोअर सर्किट का मतलब है कि उस दिन उस शेयर में उससे ज्यादा गिरावट नहीं हो सकती और सिर्फ बेचने वाले ही बाजार में मौजूद रहते हैं, खरीदार गायब हो जाते हैं. जिसकी वजह से शेयर में बिकवाली नहीं हो पाती है. क्योंकि खरीदार ही गायब हैं.
बुधवार को ही एक्सचेंज ने इस शेयर की ‘सर्किट लिमिट’ में भी बदलाव किया है. पहले यह लिमिट 20% थी, जिसे घटाकर अब 10% कर दिया गया है. इसका सीधा असर यह होगा कि अब इस शेयर में एक दिन के भीतर 10% से ज्यादा का उतार-चढ़ाव (तेजी या मंदी) देखने को नहीं मिलेगा. यह कदम आमतौर पर तब उठाया जाता है जब किसी शेयर में बहुत ज्यादा अस्थिरता (Volatility) होने की आशंका होती है.
क्यों फंसे 30 लाख शेयर?
इस गिरावट के बीच एक तकनीकी पेंच भी फंसा है. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रो के करीब 30 लाख शेयर एनएसई (NSE) की ऑक्शन विंडो यानी नीलामी प्रक्रिया में चले गए हैं. अब सवाल उठता है कि ऐसा क्यों हुआ?
दरअसल, शेयर बाजार में कई ट्रेडर ‘शॉर्ट सेलिंग’ करते हैं. यानी वे पहले शेयर बेच देते हैं, इस उम्मीद में कि जब भाव गिरेगा तो वे इसे सस्ते में खरीदकर अपनी पोजीशन बराबर कर लेंगे. ऐसा लगता है कि कई ट्रेडर्स ने ग्रो के गिरने की उम्मीद में शार्ट सेलिंग तो कर दी, लेकिन जब डिलीवरी देने का समय आया, तो वे शेयर का इंतजाम नहीं कर सके. आसान शब्दों में कहें तो, उन्होंने वो माल बेच दिया जो उनके पास था ही नहीं और समय पर खरीद भी नहीं पाए. इस वजह से अब इन सौदों को निपटाने के लिए शेयरों की नीलामी की नौबत आ गई है, जिसने बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बना दिया.
10 दिसंबर पर टिकी हैं सबकी निगाहें
अगर आप इस कंपनी में निवेशित हैं या निवेश की सोच रहे हैं, तो आपको कैलेंडर में दो तारीखें नोट कर लेनी चाहिए. पहली तारीख है 21 नवंबर, जब कंपनी मौजूदा वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित करेगी. लिस्टिंग के बाद यह कंपनी का पहला ‘रिपोर्ट कार्ड’ होगा, जिससे पता चलेगा कि कंपनी असल में कितना कमा रही है.
लेकिन इससे भी बड़ी और जोखिम भरी तारीख 10 दिसंबर है. बाजार के जानकारों और ब्रोकरेज फर्म नुवामा के मुताबिक, इस दिन कंपनी के शेयरों का एक महीने का ‘लॉक-इन पीरियड’ खत्म हो रहा है. जैसे ही यह अवधि खत्म होगी, करीब 14.92 करोड़ शेयर ट्रेडिंग के लिए आजाद हो जाएंगे. यह कंपनी की कुल हिस्सेदारी का करीब 2% है. जब इतनी बड़ी तादाद में शेयर बाजार में आएंगे, तो अगर पुराने निवेशकों ने मुनाफावसूली (Profit Booking) शुरू की, तो शेयर के भाव पर भारी दबाव देखने को मिल सकता है.
अभी भी मुनाफे में हैं आईपीओ निवेशक
तमाम बुरी खबरों के बावजूद, एक राहत की बात यह है कि जिन निवेशकों को आईपीओ में शेयर मिले थे, वे अभी भी अच्छे खासे मुनाफे में हैं. कंपनी का आईपीओ 100 रुपये के भाव पर आया था और आज की गिरावट के बावजूद शेयर 169.89 रुपये पर ट्रेड कर रहा है. यानी आईपीओ प्राइस से यह अभी भी करीब 70% ऊपर है.



