नई दिल्ली,07नवंबर । हिंद महासागर के बीचों-बीच से आई एक खबर ने पूरे अंतरराष्ट्रीय समुद्री रूट को हिला कर रख दिया। भारत से दक्षिण अफ्रीका जा रहा एक मालवाहक जहाज सोमालिया के तट के पास अचानक गोलियों औररॉकेट चालित ग्रेनेड की बारिश में फंस गया।
वही इलाका जहां कभी दुनिया के सबसे खतरनाक सोमाली डाकू राज करते थे, वहां एक बार फिर खौफ लौट आया है। ब्रिटिश सेना के मेरिटाइम ट्रेड ऑपरेशन सेंटर यानी कि समुद्री व्यापार परिचालन केंद्र ने इस हमले के बाद तुरंत हाई अलर्ट जारी कर दिया।
सूचना के मुताबिक यह जहाज भारत से दक्षिण अफ्रीका के डरबन बंदरगाह जा रहा था। जहाज माल्टा के झंडे वाला टैंकर था।
निजी सुरक्षा फर्म एम्ब्रे ने भी कहा कि हमला जारी है। उन्होंने कहा कि यह भारत के सिक्का से दक्षिण अफ्रीका के डरबन जा रहे माल्टा के झंडे वाले एक टैंकर को निशाना बनाकर किया गया।
एम्ब्रे ने आगे कहा कि ऐसा लगता है कि यह सोमाली समुद्री डाकुओं द्वारा किया गया हमला था, जिनके बारे में बताया जा रहा है कि वे हाल के दिनों में इस क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और जिन्होंने एक ईरानी मछली पकड़ने वाली नाव को अपने संचालन केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने के लिए जब्त कर लिया था। ईरान ने इस्सामोहमादी नामक मछली पकड़ने वाली नाव को जब्त करने की बात स्वीकार नहीं की है। जिस जहाज पर हमला हुआ, उसका विवरण हेलास एफ़्रोडाइट से मिलता-जुलता है, जिसने हमले के समय अपना रास्ता बदल दिया था और अपनी गति धीमी कर ली थी। जहाज के मालिकों और प्रबंधकों से टिप्पणी के लिए तुरंत संपर्क नहीं हो सका।
एक अन्य समुद्री सुरक्षा फर्म, डायप्लस ग्रुप ने बताया कि जिस टैंकर पर हमला हुआ, उसमें 24 नाविक सवार थे और कथित तौर पर सभी ने हमले के दौरान सुरक्षा के लिए खुद को जहाज के गढ़ में बंद कर लिया था। फर्म ने आगे बताया कि जहाज पर कोई सशस्त्र सुरक्षा दल मौजूद नहीं था। यूरोपियन संघ के ऑपरेशन अटलांटा, जो अफ्रीका के हॉर्न के आसपास समुद्री डकैती रोधी मिशन है, ने इस क्षेत्र में हाल ही में हुए अन्य समुद्री डाकुओं के हमलों का जवाब दिया है तथा पोत परिवहनकर्ताओं को हाल ही में चेतावनी जारी की है कि सोमालिया के पास एक समुद्री डाकू समूह सक्रिय है तथा हमले होना “लगभग निश्चित” है।
पिछले वर्ष की तुलना में सोमाली समुद्री डाकुओं के हमले फिर से तेज हो गए हैं, जिसका एक कारण यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा गाजा पट्टी में इजराइल-हमास युद्ध को लेकर लाल सागर गलियारे में हमले शुरू करने से उत्पन्न असुरक्षा का माहौल भी है।
जिस जहाज पर हमला हुआ था, उसने हमले के समय अपना रास्ता बदल दिया था और अपनी गति धीमी कर ली थी। जहाज के मालिकों और प्रबंधकों से टिप्पणी के लिए तुरंत संपर्क नहीं हो सका। एक अन्य समुद्री सुरक्षा फर्म ‘डायप्लस ग्रुप’ ने कहा कि जिस टैंकर पर हमला किया गया उसमें 24 नाविकों का एक दल सवार था। यूरोपीय संघ के ‘ऑपरेशन अटलांटा’, हॉर्न ऑफ अफ्रीका के आसपास समुद्री डकैती रोधी मिशन है। ‘ऑपरेशन अटलांटा’ ने इस संबंध में टिप्पणी के अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया।




