Vedant Samachar

AAFT University के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल के साथ शामिल हुए विधायक अनुज शर्मा…

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0 भारतीय परंपरा में शिक्षा को केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सामाजिक समरसता का माध्यम माना गया है-अनुज

रायपुर,06नवंबर (वेदांत समाचार)। आज राजधानी रायपुर के AAFT University में दीक्षांत समारोह का आयोजन हुआ जिसमें छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका व मंत्री टंकराम वर्मा के साथ धरसींवा विधायक अनुज शर्मा जी शामिल हुए। मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

विधायक अनुज शर्मा ने संबोधित करते हुए कहा कि इस गौरवशाली दीक्षांत समारोह पर मुझे अत्यंत हर्ष और गर्व की अनुभूति हो रही है। यह केवल एक शैक्षणिक अवसर नहीं, बल्कि आत्मविकास, समर्पण और सृजनशीलता का उत्सव है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि उस ज्ञान को जीवन के कार्यशैली और उपयोगी रूप में ढालना है। हमारे प्राचीन वेदों में भी यह कहा गया है कि विद्या वही है जो जीवन को सार्थक बनाती है जो व्यक्ति में अनुशासन, कौशल और आत्मबोध का विकास करे।

ऋग्वेद में कहा गया है कि “ज्ञान साधारण को असाधारण में, और संभावनाओं को शक्ति में परिवर्तित करता है।” इसीलिए हमारी सभ्यता में विद्या और कला को हमेशा एक-दूसरे का पूरक माना गया है।वर्तमान समय में भारत की नई शिक्षा नीति (एनईपी) ने इसी शाश्वत सत्य को पुनः स्थापित किया है। इस नीति ने स्पष्ट रूप से कहा है कि शिक्षा केवल सूचना देने का माध्यम नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह व्यक्ति को कर्मशील, नवाचारी और सृजनात्मक बनने में सक्षम करे। मैं इस दृष्टिकोण से गहराई से जुड़ाव महसूस करता हूँ, क्योंकि अपने जीवन अनुभव से मैंने देखा है कि असली सफलता केवल ज्ञान से नहीं, बल्कि कौशल से मिलती है।आफ्ट विश्वविद्यालय (मीडिया एंड आर्ट्स) ने कौशल-आधारित और सृजनशील शिक्षा के क्षेत्र में एक अग्रणी संस्था के रूप में अपनी सशक्त पहचान बनाई है। यह विश्वविद्यालय मीडिया और कला शिक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक मानकों से जोड़ते हुए नई दिशा दे रहा है।

यह जानकर प्रसन्नता होती है कि यहाँ शिक्षा केवल कल्पना पर आधारित नहीं है, बल्कि सटीकता, परिश्रम और व्यावहारिक दक्षता पर भी समान रूप से केंद्रित है।अपने व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर मैं कह सकता हूँ कि कौशल-आधारित शिक्षा ने मेरे जीवन की सबसे मजबूत नींव रखी है। संगीत और रंगमंच में प्रारंभिक प्रशिक्षण से लेकर फिल्म, रेडियो और जनजीवन के वर्षों के अनुभव तक मैंने सीखा है कि ‘करके सीखना’ ही सच्ची शिक्षा है।

अभ्यास से जो कौशल विकसित होता है, वही व्यक्ति को आत्मबल, आत्मविश्वास और समाज से जुड़ाव प्रदान करता है। प्रिय विद्यार्थियों, आज आपके जीवन की यात्रा का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर है- वह क्षण जब आप मार्गदर्शित शिक्षा से स्वतंत्र सृजन की ओर अग्रसर हो रहे हैं। आपकी यह उपाधि केवल आपकी पढ़ाई का परिणाम नहीं, बल्कि आपके धैर्य, अनुकूलनशीलता और अपने क्षेत्र के प्रति विश्वास का प्रतीक है।एक बार पुनः, आप सभी स्नातकों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी प्रतिभा आपके कर्म से निखरे, आपके हाथ सृजनशील रहें, आपका मस्तिष्क प्रकाशमान हो, और आपका हृदय संवेदनशील बना रहे। आपकी सफलता की यह कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका जी, विशिष्ट अतिथि के रूप में मंत्री टंकराम वर्मा व धरसींवा विधायक अनुज शर्मा, डॉ. संदीप मरवाह सहित विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रोफेसर, व्याख्याता एवं छात्र-छात्रायें उपस्थित रहे।

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