नई दिल्ली,,01नवंबर : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने सरदार पटेल मेमोरियल लेक्चर में देश की सुरक्षा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है और देश अब पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित है। भारत में आतंकवाद को बहुत हद तक खत्म कर दिया गया है। उनके मुताबिक, देश में आखिरी बड़ी आतंकी घटना 2013 में हुई थी, और उसके बाद से देश के अंदरूनी इलाकों में कोई बड़ी आतंकी वारदात नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि 1 जुलाई 2005 को एक बड़ी आतंकी घटना हुई थी, और उसके बाद 2013 तक कुछ और घटनाएँ हुईं, लेकिन उसके बाद हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं।
जम्मू-कश्मीर को छोड़कर देश सुरक्षित
डोभाल ने बताया कि अगर जम्मू-कश्मीर को छोड़ दिया जाए, जो पाकिस्तान की ओर से चलाए जा रहे छद्म युद्ध (Proxy War) का हिस्सा रहा है — तो पूरा देश आतंकवादी हमलों से सुरक्षित रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते कई साजिशों को नाकाम किया, कई आतंकियों को गिरफ्तार किया और विस्फोटक बरामद किए, जिससे हमलों को रोका जा सका।
वामपंथी उग्रवाद में भारी गिरावट
एनएसए डोभाल ने बताया कि 2014 की तुलना में देश में वामपंथी उग्रवाद (Left Wing Extremism) अब बहुत कम रह गया है। उन्होंने कहा कि अब यह पहले की तुलना में 11 प्रतिशत से भी कम रह गया है। पहले जिन ज़िलों को वामपंथी उग्रवाद प्रभावित माना जाता था, उनमें से ज़्यादातर अब सुरक्षित घोषित किए जा चुके हैं। यह दिखाता है कि देश ने अंदरूनी सुरक्षा पर काफी प्रगति की है।
भारत हर खतरे का सामना करने में सक्षम
डोभाल ने कहा कि भारत अब किसी भी तरह के आंतरिक या बाहरी खतरे का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा “हमने न केवल सुरक्षा इंतज़ाम किए हैं, बल्कि देश के हर नागरिक को यह महसूस कराना भी ज़रूरी है कि वह सुरक्षित है।” उनके अनुसार, सरकार के पास ऐसी नीतियाँ और तंत्र (systems) हैं जो किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए तैयार हैं।
हर नागरिक में सुरक्षा का भरोसा जरूरी
एनएसए ने कहा कि सिर्फ सुरक्षा उपाय करना ही काफी नहीं है। हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि हर भारतीय को अंदर से सुरक्षा का अहसास हो। उन्होंने कहा कि लोगों को भरोसा होना चाहिए कि सरकार के पास इच्छाशक्ति (willpower) और शक्ति (capability) दोनों हैं, जिससे वह देश की रक्षा कर सके।
हाशिए पर रहने वाले लोगों को सशक्त बनाना आवश्यक
डोभाल ने यह भी ज़ोर दिया कि वंचित, कमज़ोर और हाशिए पर रहने वाले लोगों को आगे लाना और सशक्त बनाना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक के जीवन से जुड़ी हुई है।
महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष जोर
एनएसए ने अपने भाषण में कहा कि महिलाओं की सुरक्षा आधुनिक शासन व्यवस्था का बहुत अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा “महिलाओं को सुरक्षा, संरक्षण और समानता का अधिकार देना ही सुशासन की पहचान है।” उनके अनुसार, महिलाओं का सशक्तिकरण और उन्हें सुरक्षित माहौल देना समाज की स्थिरता और देश की प्रगति के लिए बहुत आवश्यक है।



