जांजगीर-चांपा,25अक्टूबर (वेदांत समाचार) । पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में चलाए जा रहे नशा मुक्ति अभियान का असर अब जांजगीर जिले के दूरस्थ इलाकों में भी दिखाई देने लगा है। थाना पामगढ़ क्षेत्र के ग्राम कमरिद के सबरिया समाज के लोगों ने वर्षों पुरानी शराब बनाने की परंपरा को त्यागकर अब खेती-बाड़ी और स्वरोजगार की राह पकड़ ली है।
कमरिद गांव, जो बलौदाबाजार बॉर्डर के पास नदी किनारे बसा है, यहां के सबरिया समाज के लोग लंबे समय से कच्ची महुआ शराब बनाकर अपनी जीविका चलाते थे। लेकिन पिछले कुछ महीनों से पुलिस अधीक्षक के निरंतर प्रयासों और थाना पामगढ़ तथा शिवरायण पुलिस टीम की समझाइश के बाद समाज के लोगों ने शराब बनाना छोड़ने का फैसला किया।
शनिवार को ग्राम कमरिद में आयोजित एक कार्यक्रम में जनपद सदस्य श्रवण गोड़, समाज प्रमुख नरसिंह गोड़, तिलक राम गोड़ सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। इस दौरान उन्होंने बताया कि अब वे शराब बनाना छोड़कर खेती और सब्जी उत्पादन जैसे कामों में जुट गए हैं। उन्होंने पुलिस अधीक्षक को अपने खेतों का भ्रमण भी कराया और बताया कि अब उनका जीवन धीरे-धीरे बदल रहा है।
पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी पामगढ़ मनोहर सिन्हा और स्थानीय पुलिस टीम ने लगातार गांव में बैठकें लेकर सबरिया समाज के लोगों को नशे के दुष्परिणाम और आत्मनिर्भरता के लाभ समझाए। नतीजतन, आज गांव पूरी तरह शराबमुक्त होने की दिशा में अग्रसर है।

गांव के लोगों ने यह भी संकल्प लिया कि अब वे भविष्य में कच्ची महुआ शराब नहीं बनाएंगे। हाल ही में सबरिया समाज के कुछ लोग रायगढ़ जिले के लैलूंगा में आयोजित गेंदा महोत्सव में शामिल हुए थे, जहां उन्होंने गेंदा फूल की खेती के बारे में जानकारी ली। अब वे अपने गांव में भी इस फसल को अपनाने की तैयारी कर रहे हैं।
इस कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों के साथ-साथ थाना प्रभारी पामगढ़ मनोहर सिन्हा और समाज के वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे। पुलिस और समाज के संयुक्त प्रयास से यह गांव अब “शराब मुक्त” बनने की मिसाल पेश कर रहा है।



