दुर्ग ,25अक्टूबर (वेदांत समाचार) । दुर्ग जिले में छठ महापर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं। सूर्य उपासना का यह पावन पर्व इस साल 25 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होगी और समापन उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ होगा।
भिलाई-दुर्ग में छठ के लिए तालाबों पर व्यवस्था बेहतर की जा रही है। इसके लिए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों भी तालाबों का निरीक्षण किया है। भिलाई में 25 से ज्यादा तालाबों और दुर्ग में 10 से ज्यादा तालाबों में छठ पर्व मनाया जाएगा।
भिलाई के 25 से ज्यादा तालाबों में छठ पूजा
छठ महापर्व को लेकर भिलाई में सबसे ज्यादा तैयारियां की जा रही है। यहां पर सेक्टर-2 तालाब पर सबसे बड़ा छठ पूजा का आयोजन होता है। इसके साथ ही शहर के बैकुंठ धाम तालाब, शीतला तालाब, छावनी तालाब, मरोदा डेम समेत भिलाई के 25 तालाबों में छठ पूजा का आयोजन होगा। इसके अलावा दुर्ग में भी 10 से ज्यादा तालाबों पर छठ पूजा को लेकर व्यवस्था की जा रही है।
सेक्टर-2 तालाब बना मुख्य केंद्र
भिलाई टाउनशिप का सबसे बड़ा सेक्टर-2 तालाब इस साल भी छठ पूजा का मुख्य केंद्र रहेगा। हर साल की तरह इस बार भी यहां लाखों श्रद्धालु भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के लिए जुटेंगे।
तालाब परिसर में भक्तों ने अपनी बेदी सजाने और रंगाई-पुताई का काम लगभग पूरा कर लिया है। जिन श्रद्धालुओं ने अभी बेदी नहीं बनाई है, उन्होंने घाट पर अपने नाम और पते लिखकर जगह सुरक्षित कर ली है ताकि पूजा के दिन किसी प्रकार की असुविधा न हो।
साफ-सफाई और लाइटिंग की व्यवस्था
छठ पूजा को लेकर सभी निगम क्षेत्रों में तैयारी पुख्ता की जा रही है। भिलाई नगर निगम, दुर्ग नगर निगम, रिसाली नगर निगम, चरोदा नगर निगम और बीएसपी प्रबंधन ने अपने-अपने क्षेत्र के छठ घाटों की साफ-सफाई, लाइटिंग और सुरक्षा व्यवस्था को सुधारा है।
आज भी लाइटिंग और साफ-सफाई को लेकर कार्य जारी है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी की बेदी बनाएं, सीमेंट का उपयोग न करें।
सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था चाक-चौबंद
छठ पर्व के दौरान फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीमें भी घाटों पर तैनात रहेंगी। प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से गोताखोरों और एंबुलेंस की भी व्यवस्था की है।
बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी रखी जाएगी। दुर्ग और भिलाई में छठ पर्व की रौनक देखते ही बन रही है। बाजारों में पूजा सामग्री की खरीददारी जोरों पर है।
चार दिनों तक होगी उपासना
पहला दिन- 25 अक्टूबर: नहाय-खाय
पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होगी। इस दिन व्रती महिलाएं सुबह-सुबह किसी पवित्र जलस्रोत नदी, तालाब या कुंड में स्नान करती हैं। इसके बाद घर लौटकर सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है।
पारंपरिक रूप से इस दिन लौकी-भात या चने की दाल और अरवा चावल का सेवन किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं और आगे आने वाले उपवास के लिए शक्ति मिलती है।
दूसरा दिन – 26 अक्टूबर: खरना
छठ का दूसरा दिन खरना कहलाता है। इस दिन व्रती महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं। सूर्यास्त के बाद भगवान सूर्य की पूजा कर गुड़ की खीर और गेहूं के आटे की रोटी का प्रसाद बनाया जाता है। पूजा के पश्चात यह प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे के कठोर निर्जला व्रत की शुरुआत होती है, जो अनुशासन और आस्था का प्रतीक माना जाता है।
तीसरा दिन – 27 अक्टूबर: डूबते सूर्य को अर्घ्य
तीसरे दिन व्रती महिलाएं अपने परिवार के साथ घाटों पर पहुंचती हैं और अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करती हैं। सूप में ठेकुआ, फल, नारियल और अन्य प्रसाद सजाकर भगवान भास्कर को अर्पित किया जाता है। दीपों की जगमग रोशनी, छठ गीतों की गूंज और श्रद्धा से भरा माहौल इस दिन घाटों को दिव्य बना देता है।
चौथा दिन -28 अक्टूबर: उगते सूर्य को अर्घ्य
अंतिम दिन प्रातःकाल उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रत का समापन होता है। व्रती महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं। उषा अर्घ्य के साथ ही चार दिवसीय तप, आस्था और आत्मशुद्धि का यह पर्व पूर्ण होता है।



