Vedant Samachar

छठ महापर्व कल से, सूप-दउरा की बिक्री बढ़ी तुरिया समाज तैयार कर रहा बांस के सूप-दउरा, एक महीने से जुटे हैं 40 परिवार

Vedant Samachar
3 Min Read

छठ महापर्व का शुभारंभ 25 अक्टूबर से नहाय-खाय के साथ होगा। इसे लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। घरों, नदियों, तालाबों और अन्य जलाशयों में साफ-सफाई का काम चल रहा है, वहीं बाजारों में भी छठ सामग्री की दुकानें सज चुकी हैं।

सूप और दउरा का विशेष महत्व

पर्व में उपयोग होने वाली सबसे महत्वपूर्ण सामग्री बांस के सूप और दउरा भी बाजार में उपलब्ध हैं। हालांकि, आजकल लोग कांसे, पीतल, चांदी या प्लास्टिक के सूप का भी इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बांस से बने सूप और दउरा का आज भी विशेष महत्व है।

जानकारों के अनुसार, छठ पर्व के लिए बांस से बने सूप और दउरा को सबसे शुद्ध माना जाता है। इसी परंपरा को जीवित रखने के लिए कोडरमा जिले के झुमरीतिलैया नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 7 में तुरिया परिवार पिछले एक महीने से इन सामग्रियों को बनाने में जुटा है।

महिलाएं घरों पर सूप और दउरा तैयार करती हैं

तुरिया समाज के लगभग 40 परिवार दिन-रात बांस के सूप और दउरा बनाने में लगे हुए हैं। महिलाएं घरों पर सूप और दउरा तैयार करती हैं, जबकि पुरुष उन्हें आसपास के क्षेत्रों में जाकर बेचते हैं।

पारंपरिक शिल्प को बचाने की गुहार

समाज के लोगों का कहना है कि समय के साथ इस काम में मुनाफा कम हुआ है। तुरिया समाज की सदस्य मुस्कान ने बताया कि उनका परिवार पीढ़ियों से यह काम करता आ रहा है। उन्होंने सरकार से मदद की गुहार लगाई है ताकि इस पारंपरिक शिल्प को बचाया जा सके।

बांस की सामग्री बनाने में समस्याएं बढ़ी

वहीं, संतोषी देवी ने बताया कि पहले बांस जंगलों से आसानी से उपलब्ध हो जाया करता था। बीते कुछ वर्षों में वन अधिनियम में हुए बदलाव के कारण अब जंगलों से बांस काटने पर रोक लग चुकी है। ऐसे में अब सूप, दउरा या शादी-विवाह के लिए उपयोग में आने वाले बांस की सामग्री बनाने में समस्याएं बढ़ी हैं।

इसके साथ ही मुनाफे पर भी खासा प्रभाव पड़ा है। पहले जहां बांस के बने सामानों से 40 से 50 रुपए तक की बचत हो जाया करती थी। अब 10 से 20 रुपए का मुनाफा भी हो पाना कठिन है। इधर, ऑनलाइन पर बांस से बने सामानों की उपलब्धता से भी बिक्री पर खासा प्रभाव पड़ा है।

तुरिया समाज के लोगों का कहना है कि सरकार हमारी समस्याओं पर ध्यान दे और हमें कैसे बांस की उपलब्धता आसानी से हो सके, इस पर विचार करें।

Share This Article