हाल ही में फेड रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने ब्याज दरों में कटौती के संकेत दिए थे. अब आरबीआई गवर्नर ने भी कुछ ऐसे ही संकेत दिए हैं. इसका मतलब है कि दिसंबर के महीने में होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में आम लोगों की लोन ईएमआई कम होती हुर्द दिखाई दे सकती है. अक्टूबर में लगातार दूसरी बार ब्याज दरों को होल्ड करने के बाद आरबीआई गवर्नर ने अपने रुख को न्यूट्रल रखा था. वैसे आरबीआई मौजूदा साल में एक फीसदी की कटौती कर चुका है. अक्टूबर महीने की पॉलिसी मीटिंग में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की उम्मीद लगाई जा रही थी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उसके बाद भी आरबीआई ने महंगाई के अनुमाल में कमी और इकोनॉमी की ग्रोथ के आंकड़ों के अनुमान को बढ़ा दिया था.
अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि दो लगातार बार ब्याज दरों को होल्ड करने के बाद आरबीआई ब्याज दरों में कितनी कटौती कर सकता है? जानकारों का मानना है कि दिसंबर में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर आरबीआई फरवरी की मीटिंग में एक और कटौती की विंडो को ओपन रखेगा. इसका मतलब है मौजूदा वित्त वर्ष में और 50 बेसिस प्वाइंट की कमी देखने को मिल सकती है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर ब्याज दरों में कटौती को लेकर आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की ओर से किस तरह के संकेत दिए हैं…
5 मेंबर्स ने पॉलिसी रेट को होल्ड करने पर दिया था वोट
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की बैठक में गवर्नर संजय मल्होत्रा ने ब्याज दरों में अभी और कटौती की गुंजाइश बताते हुए संकेत दिया कि वांछित प्रभाव के लिए इसे उचित समय पर किया जाएगा. आरबीआई ने एक अक्टूबर को संपन्न हुई एमपीसी बैठक का ब्योरा बुधवार को जारी किया. इस बैठक में गवर्नर ने एमपीसी के पांच अन्य सदस्यों के साथ मिलकर रेपो दर को 5.50 प्रतिशत पर स्थिर रखने के पक्ष में मतदान किया था. इस बैठक में मल्होत्रा ने कहा था कि पूर्वानुमानों में संशोधन के परिणामस्वरूप ग्रॉस और कोर महंगाई के लिए अनुकूल दृष्टिकोण वृद्धि को और समर्थन देने के लिए नीतिगत गुंजाइश खोलता है.
अक्टूबर में क्यों नहीं हुआ था बदलाव?
मल्होत्रा ने कहा कि हालांकि, नीतिगत दर में अभी और कटौती की गुंजाइश है, लेकिन मुझे लगता है कि यह इसके लिए उपयुक्त समय नहीं है, क्योंकि इसका वांछित प्रभाव नहीं होगा. उन्होंने कहा कि इसलिए, मैं रेपो दर को 5.50 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने के पक्ष में मतदान करता हूं. बहरहाल, नीति का उद्देश्य वृद्धि को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियों को सुगम बनाना जारी रखना है. इस बैठक में एमपीसी सदस्य और आरबीआई की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा कि वृद्धि एवं मुद्रास्फीति के मेल ने नीतिगत दरों को और कम करने की गुंजाइश पैदा की है.
दिसंबर को होगी अगली बैठक
मौद्रिक नीति तय करने वाली एमपीसी की अगली बैठक तीन से पांच दिसंबर, 2025 के बीच प्रस्तावित है. रिजर्व बैंक ने फरवरी से लेकर जून के बीच हुई तीन एमपीसी बैठकों में रेपो दर में कुल मिलाकर एक प्रतिशत की कटौती की थी. हालांकि, उसके बाद अगस्त और अक्टूबर में हुई बैठकों में इसे 5.50 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है. इससे पहले आरबीआई एमपीसी ने फवरी और अप्रैल की पॉलिसी मीटिंग में 25-25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी. उसके बाद जून की पॉलिसी मीटिंग में 50 बेसिस प्वाइंट की मेगा कटौती की थी. जिसके बाद मौजूदा साल में कुल कटौती 100 बेसिस प्वाइंट यानी एक फीसदी की हो गई थी.



