रायपुर,14अक्टूबर (वेदांत समाचार) । छत्तीसगढ़ में सरकारी खरीद के लिए बनाए गए GeM पोर्टल की पारदर्शिता एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा नई विधानसभा परिषद के लिए 15 करोड़ रुपये की टेबल-कुर्सी खरीद से जुड़ा है। विभाग ने इस खरीद के लिए ऐसा टेंडर निकाला है, जिसकी शर्तें समझ से परे बताई जा रही हैं।
बता दें कि इस टेंडर के लिए विभाग ने 15 शर्तें रखी हैं। इनमें सबसे पहली और विवादित शर्त यह है कि बोली लगाने वाली कंपनी का वार्षिक टर्नओवर 300 करोड़ रुपये होना चाहिए। ऐसे में सवाल उठता है कि छोटे और मझोले कारोबारी इस प्रक्रिया में कैसे भाग ले पाएंगे। विभाग की इन शर्तों के आधार पर देश की कुछ चुनिंदा कंपनियां ही इस टेंडर में पात्र हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम प्रतिस्पर्धा खत्म करने और चुनिंदा कंपनियों को लाभ पहुंचाने वाला है।
क्या कहता है नियम
छत्तीसगढ़ सरकार ने भंडार क्रय नियम का पालन करते हुए सभी विभागों को निर्देश दिया है कि खरीदारी GeM पोर्टल से ही की जाए। जानकारों के मुताबिक इस पोर्टल में यह शर्त भी है कि जो केंद्र सरकार ने तय किया है। नियम के अनुसार जो मूल्य है उससे ज्यादा से ज्यादा चार गुना तक की गारंटी ली जा सकती है। इस नियम को मानें तो नई विधानसभा परिषद के इस काम के लिए 60 करोड़ रुपये टर्नओवर वाली कंपनियां भी पात्र मानी जा सकती थीं। लेकिन 300 करोड़ रुपये की शर्त ने प्रदेश की अधिकांश कंपनियों को स्वतः ही दौड़ से बाहर कर दिया है।
मामला यहीं खत्म नहीं होता। विभाग ने ऐसी कई शर्तें भी जोड़ी हैं, जिन्हें पूरा करना छोटे विक्रेताओं के लिए लगभग असंभव है। नियमों के अनुसार, तीन समान कार्यों की लागत निविदा मूल्य के 35% से कम नहीं होनी चाहिए, दो समान कार्यों की लागत 50% से कम नहीं होनी चाहिए, और एक समान कार्य की लागत 80% से कम नहीं होनी चाहिए। हालांकि इसमें वित्तीय वर्ष का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।
जानकारों के अनुसार, पीडब्लूडी विभाग की इन शर्तों पर देश की केवल तीन कंपनियां ही खरी उतरती हैं। कई बार टेंडर की शर्तें जानबूझकर कुछ चुनिंदा कंपनियों के अनुसार तैयार की जाती हैं ताकि प्रतिस्पर्धा सीमित रहे।
टेंडर की शर्त संख्या 13 में यह भी उल्लेख है कि संबंधित कंपनी के पास माननीयों के घरों जैसे राजभवन, मुख्यमंत्री निवास, कैबिनेट मंत्री, संसदीय सचिव, विधानसभा या अन्य सरकारी भवनों में काम करने का अनुभव अनिवार्य है।
यह पहली बार नहीं है जब GeM पोर्टल के जरिए की गई खरीद विवादों में आई हो। इससे पहले भी कई मामलों में पारदर्शिता पर सवाल उठ चुके हैं, लेकिन न तो विभागीय अधिकारी इस पर ध्यान दे रहे हैं और न ही सरकार ने अब तक कोई सख्त रुख अपनाया है।



