Vedant Samachar

क्या स्तन पर होने वाली हर गांठ ब्रेस्ट कैंसर है?

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पिछले कुछ सालों में स्तन कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में हर साल लाखों महिलाएं इस बीमारी से प्रभावित हो रही हैं. ब्रेस्ट कैंसर एक प्रकार का कैंसर है जिसमें स्तन के सेल्स असामान्य रूप से बढ़ने लगते हैं और गांठ या ट्यूमर का रूप ले लेते हैं. इसका सबसे आम लक्षण स्तन में गांठ महसूस होना है. शुरुआती पहचान और समय पर इलाज से इसके परिणाम काफी हद तक बेहतर हो सकते हैं.

ब्रेस्ट कैंसर के कारणों में जेनेटिक फैक्टर, हॉर्मोनल बदलाव, उम्र, मोटापा, अनहेल्दी खानपान और खराब लाइफस्टाइल शामिल हैं. इसके अलावा, धूम्रपान, शराब का सेवन और लंबे समय तक हॉर्मोन थेरेपी भी जोखिम बढ़ा सकते हैं. इसके अन्य लक्षणों में ब्रेस्ट के आकार में बदलाव, त्वचा पर धब्बे या खिंचाव, स्तन या निप्पल से असामान्य डिस्चार्ज, स्तन में दर्द, निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना, त्वचा का मोटा या लाल होना और कभी-कभी हाथ या बाजू में सूजन शामिल है. इसलिए शुरुआती पहचान के लिए नियमित सेल्फ-चेक और डॉक्टर की जांच बेहद जरूरी है. अक्सर लोग केवल गांठ को ही गंभीर मानते हैं, लेकिन अन्य छोटे बदलावों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

क्या स्तन पर होने वाली हर गांठ ब्रेस्ट कैंसर है?
आरएमएल हॉस्पिटल में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सलोनी चड्ढा बताती हैं कि स्तन पर हर गांठ कैंसर नहीं होती. महिलाओं के स्तन में कई कारणों से गांठ बन सकती हैं, जैसे सिस्ट, फाइब्रोएडेनोमा या संक्रमण. ये सामान्य रूप से बेनाइन यानी नॉन-कैंसर युक्त होती हैं. आमतौर पर कैंसर की गांठ कठोर होती है, बिना दर्द के होती है और समय के साथ आकार में बढ़ सकती है. इसके अलावा, कैंसर में निप्पल से असामान्य डिस्चार्ज, त्वचा में खिंचाव या लालिमा और स्तन के आकार में बदलाव जैसे संकेत देखने को मिलते हैं.

डॉ. सलोनी चड्ढा ने बताया कि किसी भी गांठ को हल्के में न लें और समय पर अल्ट्रासाउंड, मैमोग्राफी या डॉक्टर की जांच कराएं. शुरुआती पहचान से इलाज आसान और प्रभावी होता है. महिलाओं को यह समझना जरूरी है कि हर गांठ खतरनाक नहीं होती, लेकिन सावधानी बरतना बेहद आवश्यक है.

इन चीजों का ध्यान रखें
नियमित रूप से सेल्फ-ब्रेस्ट चेक करें.

स्तन में किसी भी नई गांठ या बदलाव को नजरअंदाज न करें.

डॉक्टर से समय-समय पर जांच कराएं, खासकर 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं.

स्वस्थ लाइफस्टाइल अपनाएं, हेल्दी डाइट लें और नियमित एक्सरसाइज करें.

धूम्रपान और शराब से बचें.

फैमिली हिस्ट्री होने पर विशेष सतर्क रहें.

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