Vedant Samachar

World Heart day: खराब मेंटल हेल्थ कैसे बनती है हार्ट अटैक का कारण? एक्सपर्ट से जानें

Vedant Samachar
4 Min Read

मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं हार्ट डिज़ीज़ (दिल की बीमारी) का एक नया बड़ा खतरा बन रही हैं. लंबे समय से हृदय के जोखिम को बढ़ाने वाले बड़े पांच कारण, जैसे हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, परिवार में दिल की बीमारी और धूम्रपान पहले से ही दिल की सेहत को बिगाड़ रहे हैं. लेकिन अब विशेषज्ञों ने यह मानना शुरू किया है कि मानसिक तनाव, डिप्रेशन या अन्य मानसिक समस्याएं भी दिल पर असर डाल सकती हैं.

डिप्रेशन और चिंता दिल से जुड़ी बीमारियों (major cardiovascular events) को खतरा 50 प्रतिशत बढ़ा देते हैं. विशेष रूप से तनाव-संबंधित जोखिम, जैसे PTSD (पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर), जल्दी मायोकार्डियल इंफार्क्शन, दिल की धड़कन में गड़बड़ी और अचानक दिल के दौरे वाली घटनाओं से मामला और भी गंभीर हो गया है.

कैसे मानसिक तनाव दिल को प्रभावित करता है?

अपोलो अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग में डॉ. वरुण बंसल बताते हैं कि हम लंबे समय तक तनाव या चिंता में रहते हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल और कैटेल माइंस cortisol and catecholamines जैसे हार्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर (उदाहरण के तौर पर एड्रेनालाईन) अधिक बनाते हैं. ये हार्मोन फाइट या फ्लाइट (लड़ाई या भाग जाने) प्रतिक्रिया का हिस्सा होते हैं और दबाव में शरीर इन्हें बनाने लगते हैं. ये हार्मोन दिल की धड़कन और रक्तचाप को बढ़ा सकते हैं.

तनाव से दिल पर पड़ने वाले जोखिम

डॉ बंसल कहते हैं कि मानसिक तनाव न सिर्फ सीधे हार्ट पर असर डालता है, बल्कि इसके अन्य दुष्प्रभाव भी दिल की सेहत को बिगाड़ते हैं. ये सब मिलकर शरीर में सूजन (inflammation) को बढ़ाते हैं और सूजन हार्ट डिज़ीज की शुरुआत या बिगड़ती स्थिति को बढ़ावा दे सकती है.

शारीरिक निष्क्रियता (कम हिल-डुल पाना)
खराब डाइट (अस्वस्थ भोजन)
नींद में खलल
दवाइयां भूल जाना या ले नहीं पाना
शारीरिक निष्क्रियता
कोई इंसान जब तनाव में रहता है तो अक्सर जो उसका मन अक्सर लेटे रहने का एक जगह बैठे रहने का होता है. तनाव में इंसान कम एक्टिव रहता है और व्यायाम की तरफ ध्यान भी नहीं जाता. लंबे समय तक ऐसे तनाव में रहने के कारण या कहें फिजिकल एक्टिविटी न करने के कारण दिल की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है और वो कमजोर हो जाती हैं. जिससे हार्ट की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

खराब डाइट (अस्वस्थ भोजन)
तनाव के कारण लोग अक्सर खाने-पीने का सही से ख्याल नहीं रख पाते हैं. लगातार तनाव में मरीज जंक फूड, तला हुआ और मीठा अधिक खाने लगता है. इन चीजों से वजन तो बढ़ता ही है साथ ही ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल लेवल भी बिगड़ने लगता है, जिससे पर अधिक भार बढ़ता है जो दिल को कमजोर करता है.

नींद में खलल
तनाव और चिंता की वजह से नींद पूरी नहीं हो पाती. नींद की कमी से शरीर ठीक से रिपेयर नहीं हो पाता जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है. इसका सीधा असर दिल पर बढ़ता है. नींद की कमी के कारण हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ जाता है.

दवाइयां भूल जाना या ले नहीं पाना
जो लोग पहले से ही किसी बीमारी की दवाइयां खा रहे जैसे हार्ट, ब्लड प्रेशर या शुगर की दवाइयां चल रही हो, तो मरीज कई बार तनाव में दवाइयों का कोर्स सही से पूरा नहीं कर पाता और अक्सर समय से दवा लेना भूल जाता है. इससे बीमारी नियंत्रण से बाहर हो जाती है और अचानक दिल से जुड़ी गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है.

Share This Article