हिमाचल प्रदेश,23 सितम्बर: जिला मंडी के सराज विधानसभा क्षेत्र के धारजरोल पंचायत में 30 जून को आई भारी बारिश और भूस्खलन के बाद कई गांवों की सड़कें बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गईं। पांडवशिला-रुशाड़ सड़क अब तक ठीक नहीं हुई है, जिससे घाट गांव में लोगों की गाड़ियां पिछले 85 दिनों से फंसी हुई थीं।
इन हालातों से परेशान होकर गांव वालों ने खुद एक जुगाड़ू पुल बनाया और अपनी गाड़ियों को सड़क तक पहुंचाया। गांव के लोगों ने लकड़ी के मोटे डंडों को आपस में तार से बांधकर एक अस्थायी पुल तैयार किया। इस पुल के सहारे उन्होंने गाड़ियों को 15 फीट गहरी खाई से पार कर मुख्य सड़क तक पहुंचाया।
जान जोखिम में डालकर निकालीं गाड़ियां
घाट गांव के टेक सिंह और रतिश कुमार की गाड़ियां उनके घर के आगे खड़ी थीं, लेकिन टूटी हुई पुलिया के कारण बाहर नहीं निकल पा रही थीं। गाड़ियां लंबे समय से बंद रहने के कारण उनके टायर और अन्य पुर्जे खराब हो रहे थे। टेक सिंह और रतिश ने गांव वालों से मदद मांगी, जिसके बाद करीब 30-35 लोग एकजुट हुए और मिलकर लकड़ी का यह अस्थायी पुल बनाया। चालक भूपेंद्र कुमार ने जान जोखिम में डालकर गाड़ियों को इस लकड़ी की संरचना पर सावधानी से चलाया। एक-एक गाड़ी को निकालने में करीब तीन घंटे का समय लगा।
85 दिन से बंद है 2 किलोमीटर लंबी सड़क
पांडवशिला-रुशाड़ सड़क लगभग 2 किलोमीटर लंबी है और यह दाऊंट, घाट, लौहड़, रखचूई, कौलहू, मघार, जनेहड़, भडेची कुल्हाट सरार, देथान और रुशाड़ जैसे कई गांवों को आपस में जोड़ती है। इस सड़क के बंद होने से ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने कई बार प्रशासन से सड़क को ठीक करने की मांग की, लेकिन 85 दिन बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब ग्रामीणों ने मजबूरी में खुद ही रास्ता बनाने की जिम्मेदारी उठाई है।
यह घटना न सिर्फ सरकारी अनदेखी को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि जरूरत पड़ने पर गांव के लोग मिलकर किस तरह से समाधान ढूंढ सकते हैं। हालांकि, इस तरह की जुगाड़ू व्यवस्था खतरनाक भी हो सकती है, लेकिन जब कोई विकल्प न हो, तो लोग जोखिम उठाने को मजबूर हो जाते हैं।



