जबलपुर, 17 सितम्बर 2025। कोल अधिकारियों के वेतन विसंगति का मामला निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। मंगलवार को जबलपुर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान प्रबंधन पक्ष ने कहा कि कोल मंत्रालय के संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति ने अपनी अनुशंसा दे दी है और रिपोर्ट सक्षम प्राधिकरण के अनुमोदन हेतु भेजी गई है। इस प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए प्रबंधन ने 15 दिन का समय मांगा। अधिकारियों के अधिवक्ता ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि 7 अप्रैल की सुनवाई में माननीय कोर्ट ने 8 सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का स्पष्ट निर्देश दिया था, लेकिन इससे कहीं अधिक समय बीत चुका है। कोर्ट ने इस पर सख्ती दिखाते हुए प्रबंधन के अधिवक्ता को सक्षम प्राधिकरण से स्वीकृत रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने का आदेश दिया। साथ ही अगली सुनवाई की तारीख 9 अक्टूबर निर्धारित की गई।
मामला कैसे शुरू हुआ
कोल अधिकारियों ने वेतन विसंगति सुधार की मांग को लेकर जबलपुर समेत विभिन्न हाईकोर्ट में याचिकाएँ दायर की थीं। 29 अगस्त 2023 को जबलपुर हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद 60 दिनों के भीतर समाधान निकालने का आदेश दिया था तथा 22 जून 2023 को कोयला मंत्रालय द्वारा जारी जेबीसीसीआई-11 लागू करने का पत्र निरस्त कर दिया था। इसके बाद प्रबंधन ने डबल बेंच से राहत ली और फिर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सभी मामलों को क्लब कर सुनवाई करने का आग्रह किया। नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला वापस जबलपुर हाईकोर्ट को सौंपते हुए यहीं सुनवाई के निर्देश दिए। 7 अप्रैल 2025 को हुई सुनवाई में कोर्ट ने डीपीई गाइडलाइंस के उल्लंघन पर सवाल उठाए थे। प्रबंधन ने तब बताया था कि विसंगति दूर करने के लिए कोल मंत्रालय के संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है और दो बैठकें हो चुकी हैं। इस पर कोर्ट ने 8 सप्ताह का समय दिया था।
समिति की अनुशंसा
सीआईएल चेयरमैन की पहल पर गठित इस समिति की अध्यक्षता संयुक्त सचिव बी.बी. पति कर रहे हैं। समिति में सीआईएल के निदेशक (एचआर) डॉ. विनय रंजन, एनसीएल के निदेशक (एचआर) मनीष कुमार, एमसीएल के निदेशक (एचआर) केशव राव और डीपीई के प्रतिनिधि शामिल हैं। जानकारी के अनुसार समिति ने अपनी रिपोर्ट में कोल अधिकारियों को महारत्न कंपनी का पे-स्केल दिए जाने की अनुशंसा की है। रिपोर्ट कोयला मंत्रालय के पास लंबित है और कोल सचिव व कोयला मंत्री के हस्ताक्षर के बाद इसे कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा। कोर्ट की मंजूरी मिलते ही कोल अधिकारियों को महारत्न पीएसयू का वेतनमान लागू हो जाएगा।



