सच्चिदानंद तिवारी, संवाददाता सोठी चांपा,16 सितम्बर (वेदांत समाचार)। जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम सोठी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ने पूरे क्षेत्र का माहौल भक्तिमय बना दिया है। अमलीपदर (देवभोग, जिला गरियाबंद) स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के आचार्य पंडित युवराज पाण्डेय व्यास पीठ से कथा का रसपान करवा रहे हैं। यह पावन कथा 11 सितंबर 2025 से प्रारंभ होकर 17 सितंबर तक चलेगी। आयोजन की जिम्मेदारी स्थानीय केवट परिवार ने अपने सामूहिक प्रयास से उठाई है।
कृष्ण जन्मलीला और महारास की दिव्य झलक
कथा के दौरान पंडित युवराज पाण्डेय महाराज ने 15 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का अद्भुत वर्णन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि “मनुष्य यदि एक कदम भगवान की ओर बढ़े तो भगवान स्वयं दुगुने कदम से उसकी ओर आते हैं। प्रभु भाव के भूखे हैं और सच्चे प्रेम से ही प्रसन्न होते हैं।”
कथा श्रवण के क्रम में जब महाराज ने श्रीकृष्ण की महारास लीला और कंस मोक्ष का प्रसंग सुनाया तो श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। व्यास पीठ से गूंजते संस्कृत श्लोकों और हिंदी भावार्थ ने श्रद्धालुओं को आत्मिक आनंद से भर दिया।
पचरा गीत से गूंजा पंडाल
कथा के मध्य पंडित युवराज पाण्डेय द्वारा जब पारंपरिक पचरा गीत की धुन छेड़ी गई, तो पूरा पंडाल भक्तिरस में झूम उठा। महिलाएं और पुरुष श्रद्धालु देवी मां की भक्ति में डूबकर झूमते नजर आए। वातावरण में शंख-घंटियों की ध्वनि और “हरि बोल” के जयघोष से ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा क्षेत्र किसी आध्यात्मिक तीर्थस्थल में बदल गया हो।
श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति, वर्षा बनी आशीर्वाद
सोठी ग्राम ही नहीं बल्कि आसपास के कई गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे। कथा स्थल पर भक्तों की भीड़ उमड़ने से जगह-जगह भक्ति भाव से परिपूर्ण झांकी और सजावट की गई थी।
15 सितंबर की कथा के दौरान इंद्रदेव की कृपा स्वरूप हल्की वर्षा भी हुई। वर्षा को श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद माना। सुरक्षा की दृष्टि से उस दिन कथा का विवरण संक्षिप्त कर विराम दिया गया, किंतु भक्तों की आस्था और उत्साह पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
भक्तिमय रंग में रंगा सोठी क्षेत्र
इस आयोजन ने ग्राम सोठी ही नहीं, पूरे आसपास के क्षेत्र को भक्ति रस में डुबो दिया है। श्रीमद्भागवत कथा के पावन अवसर पर सभी वर्ग के लोग एकत्र होकर श्रीकृष्ण भक्ति में लीन हो रहे हैं। आयोजन स्थल पर प्रतिदिन धार्मिक माहौल के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव और एकता की भी झलक दिखाई दे रही है।
17 सितंबर को कथा का समापन होगा, जिसके लिए भक्तगण विशेष उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे हैं। आयोजक केवट परिवार ने ग्रामवासियों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन सभी की सामूहिक आस्था और सहयोग से ही संभव हुआ है।



