Vedant Samachar

Weight loss medicine: वजन घटाने की दवा बीच में ही छोड़ रहे लोग, रिसर्च में खुलासा

Vedant Samachar
4 Min Read

मोटापा रोकने के लिए दवाओं का एक समूह, ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट (GLP-1 RAs), लोगों को वजन कम करने में एक प्रभावी दवा है. हालांकि, यूरोपीय मधुमेह अध्ययन संघ (EASD) की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत एक नए जनसंख्या-व्यापी अध्ययन में पाया गया है कि डेनमार्क में वजन घटाने वाली दवा सेमाग्लूटाइड लेना शुरू करने वाले आधे से ज्यादा युवाओं ने एक साल के भीतर ही इस दवा को खाना छोड़ दिया है.

मोटापे को कम करने के लिए कई तरह की दवाएं मार्केट में उपलब्ध हैं. इनमें से दवा GLP-1 Ras है. इसे सेमाग्लूटाइड भी कहते हैं जो GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट दवाओं के समूह में आती है. ये दवाएं शरीर की भूख को कम करती है और दिमाग को ये संकेत देती है कि पेट फुल हो चुका है यानी ओवर इटिंग से बचाते हैं. जिससे इंसान कम खाता है और वजन घटता है. हालांकि इसके विपरीत लोग इस दवा का कोर्स पूरा नहीं करते और एक साल के भीतर ही सेमाग्लूटाइड लेना छोड़ देते हैं.

दवा छोड़ने की बड़ी वजहें क्या हैं

सेमाग्लूटाइड दवा के कोर्स की सालाना कीमत लगभग 2,000 यूरो है जिसका भारतीय मूल्य लगभग 1.8 लाख रुपये है. इतनी महंगी दवा हर कोई अफोर्ड नहीं कर पाता. कई लोगों में इस दवा को लेने के बाद आंतों और गैस की समस्या बढ़ती दिखी, हालांकि कई लोगों को ये दिक्क्तें पहले से भी थी, लेकिन दवा लेने के बाद मतली, उल्टी और दस्त जैसे साइड इफेक्ट्स बढ़ते दिखे. इसी कारण बहुत से लोगों ने इस दवा का कोर्स बीच में छोड़ दिया. दवा को बीच में छोड़ने वालों में 18 से 29 साल के युवा लोग अधिक थे. इसके अलावा कम आय वाले परिवार भी इस दवा को बीच में छोड़ देते है.

एक साल में दवा छोड़ने के आंकड़े

जिन लोगों ने सेमाग्लूटाइड को पहली बार लिया उनमें से 77,320 लोगों ने दवा का कोर्स बीच में ही छोड़ दिया. 18% लोगों ने 3 महीने में, 31% लोगों ने 6 महीने में और 42% लोगों ने 9 महीने के भीतर ही सेमाग्लूटाइड को लेना बंद कर दिया.

एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि दवा बंद करने के बाद वजन दोबारा बढ़ना आम है. रिसर्च में शामिल प्रोफेसर रीमर डब्ल्यू. थॉमसन का कहना है कि ये दवाएं त्वरित समाधान नहीं हैं, इन्हें लंबे समय तक लेना पड़ता है. वरना दवा का असर खत्म होते ही भूख फिर से बढ़ जाती है और वजन घटाने का फायदा चला जाता है.

क्यों है यह चिंता की बात?

मोटापा पहले से ही दुनिया और खासकर यूरोप में तेजी से बढ़ रहा है. आधे से ज्यादा वयस्क या तो ओवरवेट हैं या मोटापे के शिकार हैं. ऐसे में अगर लोग दवा शुरू करके बीच में ही छोड़ देते हैं, तो उनके स्वास्थ्य पर और भी खतरे बढ़ सकते हैं जैसे डायबिटीज़, हार्ट डिजीज और ब्लड प्रेशर.

यह अध्ययन बताता है कि वजन घटाने की दवाएं तभी कारगर हैं जब लोग उन्हें लंबे समय तक जारी रखें. लेकिन महंगी कीमत, साइड इफेक्ट्स और जीवनशैली की मुश्किलें इसकी सबसे बड़ी बाधा हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसे उपाय तलाशने होंगे जिससे लोग दवा के इस्तेमाल में लगातार बने रहें और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिल सके.

Share This Article