Vedant Samachar

श्री अग्रसेन कन्या महाविद्यालय कोरबा में रजत जयंती समारोह सप्ताह के अंतर्गत परिचर्चा का आयोजन

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कोरबा, 13 सितम्बर । छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने पर श्री अग्रसेन कन्या महाविद्यालय कोरबा में रजत जयंती समारोह सप्ताह के अंतर्गत एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। दिनांक 9 सितंबर 2025 को आयोजित इस कार्यक्रम में “छत्तीसगढ़ के पच्चीस वर्षों की विकास यात्रा” विषय पर परिचर्चा हुई।


परिचर्चा का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ के गौरवशाली अतीत का स्मरण करवाते हुए इसके नींव से जोड़ना था। कार्यक्रम का आयोजन सुनील जैन (अध्यक्ष, महाविद्यालय शिक्षण समिति) एवं प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार झा के नेतृत्व में हुआ।


परिचर्चा में हेमंत माहुलिकर (प्रदेश महामंत्री, संस्कार भारती) एवं विवेक लांडे (सेवा निवृत्त प्राचार्य, उत्कृष्ट स्वामी आत्मानंद विद्यालय) बतौर मुख्य वक्ता शामिल हुए। दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना एवं राज्यगीत के साथ कार्यक्रम का आरंभ हुआ। प्राचार्य ने अपने उद्बोधन से विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया और छत्तीसगढ़ की अमूल्य धरोहर के संरक्षण का आह्वान किया।

मुख्य वक्ता श्री माहुलिकर ने अपने वक्तव्यों द्वारा विद्यार्थियों को इमारत की नींव का महत्व समझाया और जनजातियों को परंपराओं तथा संस्कृति का वास्तविक संरक्षक बताया। उन्होंने श्री हरि सिंह क्षत्री और श्रीमती तिजन बाई का उल्लेख करते हुए विभिन्न कलाओं का जीवंत चित्रण प्रस्तुत किया और युवाओं से अपनी नव ऊर्जा का सदुपयोग करने का आह्वान किया। विवेक लांडे ने विभाजन से पहले मध्यप्रदेश के अंतर्गत छत्तीसगढ़ प्रांत की स्थिति एवं समस्याओं पर बात की और छत्तीसगढ़ में सरकार द्वारा क्रियान्वित विभिन्न योजनाओं जैसे पीएम श्री, CHALK की जानकारी दी। उन्होंने युवाओं से छत्तीसगढ़ के विकास का सहभागी बनने का संदेश दिया।


महाविद्यालय की छात्राओं ने भी परिचर्चा में बढ़-चढ़कर अपनी सहभागिता प्रदान की। बीएड के प्रशिक्षार्थी छात्र-छात्राओं ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय शिक्षा संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ. पी एस पैकरा ने सभी का आभार व्यक्त किया।


इस कार्यक्रम का समन्वयक श्रीमती डॉली एन शंकर (सहायक प्राध्यापक, शिक्षा संकाय) ने प्रशिक्षार्थी कौशलेन्द्र, रेखा सोनी, मनीषा यादव, रीतिका झा के सहयोग से किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय के सभी प्राध्यापकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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