Vedant Samachar

मानसून ने छीनी किसानों की रोजी-रोटी; खेतों में डूब गई मेहनत! सड़कें टूटीं, मंडी तक नहीं पहुंची उपज

Vedant Samachar
4 Min Read

नालागढ़,07 सितम्बर : नालागढ़ क्षेत्र में इस बार का मानसून (Monsoon) सिर्फ पहाड़ों और घरों पर ही भारी नहीं पड़ा बल्कि किसानों की जिंदगी पर भी कहर बनकर टूटा। जमीन धंसने और सड़कों के टूटने से जहां संपर्क मार्ग हफ्तों तक बंद रहे, वहीं लगातार बरसी बारिश ने खेतों में मेहनत से तैयार हुई नकदी फसलें चौपट कर दीं। टमाटर, अदरक, धनिया और फ्रांसबीन जैसी फसलें या तो खेतों में सड़ गईं या मंडी तक नहीं पहुंच पाईं। किसानों की हालत यह हो गई है कि जिन फसलों से रोज़ाना हजारों रुपए की कमाई होती थी, अब वे खेतों और गोशालों में सढ़कर बर्बादी का ढ़ेर बन रही हैं।

लाखों का नुकसान ङोल रहे किसान कजऱ् की चिंता में डूबे हैं और राहत की उम्मीद लेकर सरकार और प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। नालागढ़ और दून के पहाड़ी इलाकों में ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य साधन नकदी फसलें ही है, लेकिन इस बार की बरसात ने इन्हें खासा नुकसान पहुंचाया है। कोईडी पंचायत के जगली निवासी बालकिशन बताते हैं कि रास्ते बंद रहने से सारी फसल चौपट हो गई। उनका कहना है कि बीज और खाद उधार लेकर खरीदी थी, अब कजऱ् चुकाना मुश्किल हो गया है। नड़ पंचायत के धार निवासी एक किसान ने कहा कि टमाटर की फसल तैयार थी मगर धर्माणा रोड बंद रहने से सब्जियां मंडी तक नहीं पहुंचीं।

काननी बायला के चेतन कौशल ने बताया कि बायला-साई रोड लगातार बंद है, स्प्रे न हो पाने से फसल खराब हो गई। पहले उनकी खेती से 50 Rेट तक निकलते थे, अब मुश्किल से 10 Rेट ही मिल रहे हैं। नड़ पंचायत के जगदीश का कहना है कि मक्की की पूरी फसल बर्बाद हो चुकी है, जबकि हरी मिर्चए टमाटर, खीरा, धनिया और अदरक की करीब 60 प्रतिशत उपज चौपट हो गई है। अलयोंण गांव के अजरुन ने बताया कि सड़क टूटी हुई है, हालात इतने खराब हैं कि वे मोटरसाइकिल से लेकर बड़ी गाडियों तक एक-एक Rेट सब्ज़ी मंडी तक ढोने को मजबूर हैं।

नुक्सान का आकलन कर मुआवजा जारी किया जाएगा
इस बीच कृषि विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ संदीप गौतम ने कहा कि यह नुकसान पूरी तरह प्राकृतिक आपदा के कारण हुआ है। उन्होंने बताया कि नकदी फसलें जैसे टमाटर और अदरक भी फसल बीमा योजना में शामिल हैं, किसानों को समय रहते बीमा करवाना चाहिए ताकि ऐसे हालात में राहत मिल सके। सड़कों के बंद रहने से किसानों को उपज मंडी तक ले जाने में दिक्कत हुई है और विभाग इस विषय पर रिपोर्ट तैयार कर रहा है। सारी उम्मीदें सरकार और प्रशासन पर टिकी हैं कि कब तक नुकसान का आकलन कर राहत और मुआवजा जारी किया जाएगा।

पहाड़ी दरकने से खेतों में आया मलबा
किसानों का कहना है कि हालात कुछ दिनों से बिगड़े हुए हैं। लगातार बारिश से खेतों में पानी भर गया, फसल पर कीट और रोग लग गए। जो थोड़ी बहुत उपज बची भी थी, वह समय पर स्प्रे न होने से खराब हो गई। ज्यादातर किसानों ने बीज, पनीरी और खाद उधार लेकर खरीदी थी। अब खेतों और गोशालों में लाखों रुपए की सब्जियां सड़ रही हैं और किसान कजऱ् चुकाने की चिंता में डूबे हैं। वहीं कटली गांव के बलविंदर ने बताया कि पहाड़ी दरकने से खेतों में मलबा आ गया जिससे अदरक की फसल को खासा नुकसान पहुंचा है।

Share This Article