इस बार मानसून ने हिमाचल-पंजाब में पूरी तरह से तबाही मचा दी है। माझा, मालवा और दोआबा के गांवों में लोग घरों से बेघर हो गए है। पहाड़ों पर हो भारी बरसात से दरिया व नदिया उफान पर है। इसी बीच मौसम माहिरों ने 3 सितंबर के लिए हिमाचल प्रदेश सहित पंजाब में भारी बारिश का अलर्ट जारी कर दिया है। माहिरों का कहना है कि पंजाब में बाढ़ का खतरा फिलहाल टला नहीं है क्योंकि लो प्रैशर एरिया व वैस्टर्न डिस्टरबैंस के साथ मानसून एक बार फिर से मजबूत स्थिति में है।पंजाबी पारंपरिक कपड़े
इस वैदर सिस्टम का असर 30 से ही दिखने लग गया है। अगर यह मानसून का आखिरी स्पैल मजबूत रहता है तो एक बार फिर से लोग सकंट में आ सकते हैं। मौसम एक्पर्ट सुखचैन गुरना के मुताबिक पंजाब के 90 फीसदी इलाकों में बारिश होनी है। मगर 50 फीसदी इलाकों में भारी से भारी बारिश हो सकती है। वहीं दूसरी तरफ पहाड़ों में बादल फटने की घटनाएं दोबारा से हो सकती है क्योंकि यह सिस्टम काफी मजबूत है। इसी से दरिया और नदियों में पानी का स्तर बढ़ेगा।
अब तक हुई बारिश
आईएमडी के मुताबिक 22 से 28 अगस्त तक पंजाब में 341 फीसदी बारिश हो चुकी है। बरनाला प्लस 887 फीसदी, तरनतारन प्लस 628 फीसदी, गुरदासपुर प्लस 627 फीसदी, संगरूर प्लस 584 फीसदी, मानसा प्लस 478 व फिरोजपुर में प्लस 450 फीसदी बादल बरसे है। यह बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले इलाके है। वहीं, लुधियाना प्लस 355 फीसदी, अमृतसर प्लस 342 फीसदी, जालंधर प्लस 288 फीसदी बारिश हुई है। इन इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश रिकार्ड की गई है।
बैक टू बैक वैस्टर्न डिस्टरबैंस ने किया एक्टिव
मौसम माहिरों का कहना है कि इस बार मानसून काफी अच्छा रहा है क्योंकि एक के बाद एक वैस्टर्न डिस्टरबैंस ने मानसून को स्पोर्ट किया है। इसी वजह से पहाड़ों के बाद मैदानों में लगातार बारिश देखने को मिल रही है।
अभी फिलहाल मानसून की विदाई दूर
माहिरों के मुताबिक इस समय मौसम की जो स्थिति बनी हुई है उसके मुताबिक अभी मानसून के विदाई लेने में लंबा समय लग सकता है। एमजेओ सिस्टम के मुताबिक मानसून 2 अक्तूबर तक बना रह सकता है। अगर मानसून के 15 दिन ड्राई रह जाते है या उससे पहले बारिश कहीं-कहीं ही हो तो मानसून के वापसी का सफर 15 सितंबर से शुरू हो जाता है। लेकिन इस बार मानसून का यह स्पैल लंबा रह सकता है।



