रायपुर ,26अगस्त (वेदांत समाचार) : जैन समुदाय का प्रमुख पर्व संवत्सरी महापर्व इस वर्ष 27 और 28 अगस्त को राजधानी स्थित लालगंगा पटवा भवन, टैगोर नगर में धूमधाम से मनाया जाएगा। रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष अशोक पटवा ने बताया कि इस अवसर पर दो दिनों तक विविध धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
संवत्सरी महापर्व का महत्व
जैन धर्म में संवत्सरी महापर्व आत्मशुद्धि और क्षमा का पर्व माना जाता है। इसे पर्युषण पर्व का समापन दिवस भी कहा जाता है। इस दिन साधु-साध्वियाँ और श्रावक-श्राविकाएँ पूरे वर्ष में किए गए अपराधों, भूलों और अनुचित कर्मों के लिए क्षमा मांगते हैं। इसे जैन समाज में क्षमापना दिवस भी कहा जाता है। संवत्सरी को “अंतर्राष्ट्रीय क्षमा दिवस” के रूप में भी जाना जाता है।
कार्यक्रम का विस्तृत विवरण
पहला दिन: 27 अगस्त (बुधवार) – संवत्सरी महापर्व
सुबह 8:15 बजे अंतागढ़ सूत्र वाचन होगा।
दोपहर में धर्मचर्चा एवं आत्मालोचना कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
शाम 6 बजे श्रावक-श्राविकाओं और बच्चों का सामूहिक प्रतिक्रमण होगा।
दूसरा दिन: 28 अगस्त (गुरुवार) – क्षमापना एवं पारणा महोत्सव
सुबह 6:30 बजे क्षमापना कार्यक्रम होगा।
बाहर से पधारी स्वाध्यायी बहनों का सम्मान किया जाएगा।
इसके बाद सामूहिक पारणा की व्यवस्था की गई है।
समाज को आह्वान
रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष अशोक पटवा ने कहा: “आप सभी श्रमण संघ की आन, बान और शान हैं। संघ की शोभा आपसे ही है। अतः अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस संवत्सरी महापर्व और क्षमापना-पारणा महोत्सव को सफल बनाइए।”
क्या है प्रतिक्रमण?
जैन धर्म में प्रतिक्रमण आत्ममंथन और आत्मालोचना का एक प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान है। इसमें साधक अपने दैनिक आचरण की समीक्षा करते हैं और जो भी गलतियाँ हुई हों, उनके लिए क्षमा याचना करते हैं। संवत्सरी प्रतिक्रमण को पूरे वर्ष का सबसे बड़ा प्रतिक्रमण माना जाता है।



