रायपुर,24अगस्त (वेदांत समाचार)। कृषि निर्यातकों को सहायता देने के लिए वाणिज्य मंत्रालय की इकाई एपीडा ने पटना, देहरादून और रायपुर में तीन नए क्षेत्रीय कार्यालय खोलने का निर्णय लिया है। अभी एपीडा का मुख्यालय दिल्ली में है और इसके 16 क्षेत्रीय कार्यालय बेंगलुरु, श्रीनगर, जम्मू, लद्दाख, गुवाहाटी, मुंबई, वाराणसी, कोच्चि और भोपाल समेत कई शहरों में पहले से मौजूद हैं।
जानें क्या है APEDA
gricultural and Processed Food Products Export Development Authority का कार्यालय खुलने से छत्तीसगढ़ के किसानों, उत्पादकों और निर्यातकों को अनेक लाभ एक ही स्थान पर मिलेंगे। उन्हें ट्रेनिंग, प्रमाणन, पैकेजिंग, मानकीकरण और निर्यात संबंधी सेवाओं के लिए दूसरे राज्यों के कार्यालयों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। APEDA प्रमाणन और ब्रांड प्रमोशन में सहयोग करता है। इससे राज्य में फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, कोल्ड स्टोरेज, पैक हाउस जैसे सुविधाओं का विकास होगा।
क्या होगा फायदा
राज्य में APEDA कार्यालय की स्थापना से अब फाइटो-सेनेटरी प्रमाणपत्र, गुणवत्ता प्रमाणन, लैब टेस्टिंग, और निर्यात से जुड़ी प्रक्रियाएं यहीं पूरी की जा सकेंगी। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि किसानों और निर्यातकों की लागत में भी कमी आएगी।
APEDA कार्यालय से फल, सब्ज़ियां, चावल, GI टैग वाले उत्पाद, मिलेट्स और अन्य कृषि उत्पादों का सीधे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में निर्यात आसान होगा। निर्यात से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी. साथ ही, नई तकनीकों, गुणवत्ता नियंत्रण, आधुनिक पैकेजिंग और अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग की जानकारी और प्रशिक्षण उन्हें स्थानीय स्तर पर मिल सकेगा।
जानकारी के अनुसार, एपीडा के प्रयासों से देश का कृषि निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 में 50 अरब डॉलर को पार कर चुका है। प्राधिकरण अब पारंपरिक उत्पादों जैसे अनाज और भैंस के मांस के साथ-साथ नए उत्पादों जैसे जैविक सामान, प्रसंस्कृत फल और जूस के निर्यात को भी बढ़ावा दे रहा है।
इसके अलावा, नाशवान वस्तुओं के लिए समुद्री प्रोटोकॉल विकसित किए जा रहे हैं ताकि निर्यात टिकाऊ और किफायती बने और प्रतिस्पर्धा की क्षमता बढ़े। साथ ही, बाजरा और चावल से बने नए उत्पादों पर अनुसंधान के लिए भारतीय मोटा अनाज अनुसंधान संस्थान और अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान से सहयोग किया जा रहा है। खाने-पीने की चीजों की ताजगी और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पैकेजिंग तकनीक में भी सुधार किए जा रहे हैं।



