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अकाल की चपेट में गाज़ा? UN की रिपोर्ट से मचा हड़कंप, इज़राइल ने उठाए सवाल

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गाजा,24अगस्त : संयुक्त राष्ट्र ने अभूतपूर्व कदम उठाते हुए आधिकारिक रूप से गाजा पट्टी में अकाल की घोषणा की है। यह पश्चिम एशिया में पहली बार है जब किसी क्षेत्र को औपचारिक रूप से ‘फेमाइन ज़ोन’ यानी अकाल क्षेत्र घोषित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, गाजा के लगभग पांच लाख लोग इस समय घातक भूख, कुपोषण और चिकित्सा आपूर्ति की भारी कमी का सामना कर रहे हैं।

UN ने इज़रायल पर लगाए गंभीर आरोप

यूएन के मानवीय सहायता प्रमुख टॉम फ्लेचर ने कहा कि यह संकट पूरी तरह टाला जा सकता था, यदि मानवीय सहायता की आपूर्ति में व्यवधान नहीं होता। उन्होंने इज़रायल पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने गाजा में राहत सामग्रियों की आवाजाही में लगातार अवरोध खड़े किए, जिससे हालात भयावह होते गए।

इज़रायल ने जताई कड़ी आपत्ति

इज़रायल सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट और आईपीसी (Integrated Food Security Phase Classification) की घोषणा को ‘राजनीति प्रेरित और तथ्यहीन’ बताया है। इज़रायली विदेश मंत्रालय ने इसे “हमास के झूठ पर आधारित रिपोर्ट” कहते हुए खारिज कर दिया है। इज़रायल का दावा है कि गाजा में “कोई भी वास्तविक अकाल जैसी स्थिति नहीं है”, और UN की रिपोर्ट एकतरफा है।

आईपीसी रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े

रोम स्थित IPC पैनल की रिपोर्ट बताती है कि गाजा पट्टी का करीब 20% क्षेत्र विशेष रूप से गाजा शहर और गाजा प्रांत आईपीसी चरण 5 में पहुंच चुका है, जिसे “अकाल की स्थिति” माना जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, 1 जुलाई से 15 अगस्त के बीच एकत्र किए गए डेटा के आधार पर अनुमान है कि सितंबर के अंत तक यह संकट और भी गहराएगा और भूख से जूझ रहे लोगों की संख्या बढ़कर 6.4 लाख हो सकती है, जो गाजा की कुल आबादी का एक तिहाई है।

22 महीने से जारी संघर्ष ने बिगाड़ी स्थिति

गाजा में यह मानवीय संकट अचानक पैदा नहीं हुआ है। 7 अक्टूबर, 2023 को हमास द्वारा इज़रायल पर किए गए हमले के बाद शुरू हुई जंग अब 22 महीने लंबी हो चुकी है। इस दौरान इज़रायल ने गाजा पर व्यापक हवाई हमले किए और भोजन, पानी, दवा तथा ईंधन जैसी जरूरी आपूर्तियों पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते इज़रायल ने समय-समय पर सीमित मात्रा में सहायता सामग्री भेजने की अनुमति दी, लेकिन यह आपूर्ति जरूरतों के मुकाबले बेहद नाकाफी साबित हुई। परिणामस्वरूप गाजा में हालात दिन-ब-दिन बदतर होते गए।

संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता, कहा – ‘युद्ध अपराध’

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख ने गाजा को जानबूझकर भूखा रखने को युद्ध अपराध बताया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि अब भी कार्रवाई नहीं की गई, तो गाजा में हजारों निर्दोष नागरिक विशेष रूप से बच्चे और बुज़ुर्ग भुखमरी के कारण अपनी जान गंवा सकते हैं।

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