Vedant Samachar

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: विधवा बहू का ससुर से भरण-पोषण पाने का अधिकार

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट


बिलासपुर, 21 अगस्त (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 19 के तहत एक विधवा बहू अपने पुनर्विवाह करने तक ससुर से भरण-पोषण पाने की हकदार है। यह फैसला कोरबा के फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर आया है।

कोरबा निवासी चंदा यादव ने अपने ससुर तुलाराम यादव से भरण-पोषण की मांग की थी, जिसके बाद फैमिली कोर्ट ने चंदा के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ससुर को हर महीने 2,500 रुपये देने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने इस फैसले को बरकरार रखते हुए ससुर की अपील खारिज कर दी है।

हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम 1956 के तहत एक विधवा बहू धारा 19 के तहत अपने ससुर से भरण-पोषण पाने की हकदार है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति की मौत के बाद कोई भी विधवा महिला ससुर से भरण पोषण के लिए गुजारा भत्ता मांग सकती है, बशर्ते वह अपनी कमाई या अपनी संपत्ति से अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ हो ।

इस फैसले के साथ, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने विधवा बहू के अधिकारों को मजबूत किया है और स्पष्ट किया है कि वे अपने ससुर से भरण-पोषण पाने की हकदार हैं, जब तक कि वे अपने पति की संपत्ति से अपना गुजारा नहीं कर सकती हैं या पुनर्विवाह नहीं कर लेती हैं। यह फैसला उन विधवा महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण राहत है जो अपने ससुराल से आर्थिक समर्थन की मांग कर रही हैं ।

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