डायबिटीज एक मेटाबॉलिक बीमारी है जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता या उसका सही इस्तेमाल नहीं कर पाता. इसके कारण ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है और धीरे-धीरे कई अंग प्रभावित होने लगते हैं. टाइप 1 डायबिटीज जेनेटिक फैक्टर के कारण होती है, जबकि टाइप 2 डायबिटीज खराब लाइफस्टाइल, मोटापा, तनाव, हॉर्मोनल इम्बैलेंस और बढ़ती उम्र के कारण ज्यादा देखी जाती है. आमतौर पर लोग धूम्रपान, खराब डाइट और मोटापे को डायबिटीज का बड़ा कारण मानते हैं, लेकिन हाल ही की एक रिसर्च में यह सामने आया है कि नींद की कमी भी डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकती है. आइए जानें.
अगर डायबिटीज को कंट्रोल न किया जाए तो यह शरीर के कई हिस्सों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है. लगातार हाई ब्लड शुगर से आंखों की रोशनी कमजोर हो सकती है, किडनी फेल होने का खतरा बढ़ सकता है और नसों को नुकसान पहुंच सकता है. इतना ही नहीं, डायबिटीज़ मरीजों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का रिस्क सामान्य लोगों की तुलना में कई गुना अधिक होता है. लंबे समय तक अनकंट्रोल डायबिटीज से इम्यून सिस्टम भी कमजोर हो जाता है, जिससे बार-बार इंफेक्शन होने लगते हैं. यही कारण है कि डायबिटीज़ को सिर्फ शुगर की बीमारी न मानकर एक गंभीर हेल्थ कंडीशन समझना जरूरी है.
नींद और डायबिटीज का क्या है कनेक्शन?
Harvard-affiliated Brigham and Women’s Hospital में हुई रिसर्च के मुताबिक, पर्याप्त नींद लेना स्वस्थ शरीर के लिए उतना ही जरूरी है जितना हेल्दी डाइट और एक्सरसाइज. रिसर्च में पाया गया है कि नींद की कमी से शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी कम हो जाती है, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल नहीं रह पाता. नींद पूरी न होने पर स्ट्रेस हॉर्मोन कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ता है और भूख से जुड़े हॉर्मोन इम्बैलेंस हो जाते हैं. इसका असर मेटाबॉलिज़्म पर पड़ता है और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है. सबसे अहम बात यह है कि यह प्रभाव वजन बढ़े बिना भी हो सकता है, यानी आप आप फिट हैं लेकिन पर्याप्त नींद नहीं लेते, तो भी डायबिटीज़ का रिस्क बना रहता है.
कैसे करें बचाव
रोजाना 78 घंटे की नींद लें.
सोने और उठने का समय तय रखें.
सोने से पहले मोबाइल/टीवी का उपयोग कम करें
दिन में हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें.
कैफीन और अल्कोहल का सेवन सोने से पहले न करें.
तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन या योग अपनाएं.



