आजकल शेयर बाजार में आईपीओ की भरमार हो गई है. हर दिन कोई नया आईपीओ आता है और शुरुआत में उसकी लिस्टिंग धमाकेदार होती है. लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन शेयरों में गिरावट शुरू हो जाती है. एक रिपोर्ट में इस आईपीओ के फ्लॉप गेम का खुलासा हुआ है, जिसमें बताया गया है कि कैसे कई टॉप आईपीओ ने निवेशकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. पिछले कुछ सालों में भारतीय शेयर बाजार में कई नई उम्र की कंपनियों ने जोरदार एंट्री की, लेकिन एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, उनकी चमक ज्यादा दिन तक कायम नहीं रह पाई. मल्टी फैमिली ऑफिस क्लाइंट एसोसिएट्स की रिपोर्ट बताती है कि मई 2020 से जून 2025 के बीच लिस्ट हुई नई उम्र की कंपनियों में से केवल 36% ही लंबी अवधि में पॉजिटिव अल्फा दे पाईं, यानी उन्होंने बीएसई 500 इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया. इसके अलावा बाकी सभी ने निवेशकों के पैसे बर्बाद किए हैं.
10 में से 6 ने निवेशकों को किया निराश
मल्टीफैमिली ऑफिस Client Associates की हालिया स्टडी में सामने आया है कि 2020 से 2025 के बीच लिस्ट हुई 25 नई-एज IPO कंपनियों में से ज्यादातर ने निवेशकों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा. रिपोर्ट के मुताबिक, केवल 36 फीसदी कंपनियां ही निवेशकों को लंबे समय तक संतोषजनक रिटर्न दे पाईं. यानी 10 में से करीब 6 कंपनियां निवेशकों के लिए निराशा ही साबित हुईं. रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि IPO के छह महीने बाद का समय यानी लॉक-इन एक्सपायरी पीरियड सबसे बेहतर साबित हुआ. इस अवधि तक लगभग 52 फीसदी कंपनियां सकारात्मक रिटर्न पर थीं. वहीं, प्री-IPO दौर में निवेश करने वालों में से भी सिर्फ 43 फीसदी ही लाभ में रहे, जो बताता है कि प्री-IPO निवेश भी जोखिम भरा और हर कंपनी की चमकदार परफॉर्मेंस नहीं दिखा सका.
लंबे समय में निवेशकों की टेंशन बढ़ी
2020 से 2025 के बीच लॉन्च हुई नई IPO कंपनियों में शुरुआत तो धमाकेदार रही. Client Associates की रिपोर्ट बताती है कि इन IPOs को औसतन 48.5 गुना सब्सक्रिप्शन मिला, मतलब शेयर खरीदने के लिए इतनी ज्यादा भीड़ लगी कि दाम दिनभर चढ़ते ही रहे. करीब 68% IPOs ने पहले दिन ही लगभग 24% तक का बढ़त दिखाया, जिससे शुरुआती निवेशकों का उत्साह बढ़ गया. लेकिन ये चमक ज्यादा दिन तक नहीं टिक सकी. लंबी दौड़ में सिर्फ 36% कंपनियां ही ऐसी रहीं जो निवेशकों को अच्छा रिटर्न दे पाईं. लिस्टिंग के बाद हालत और खराब हुए. रिपोर्ट में साफ है कि कुछ कंपनियां ही लिस्टिंग के बाद भी ठीक-ठाक परफॉर्म कर पाईं. कई बार IPO के दाम ही कंपनी की सबसे ऊंची कीमत साबित हुए और उसके बाद शेयर गिर गए. रिपोर्ट ने खासतौर पर रिटेल फ्रेंजी वाली 10 IPO कंपनियों की भी जांच की, जिनमें ज़ोमैटो, पॉलिसी बाजार और इक्सिगो जैसे नाम बढ़िया रहे. लेकिन पेटीएम, ओला इलेक्ट्रिक और मोबिक्विक जैसे बड़े नामों ने निवेशकों को निराश किया. इन 10 IPOs में प्री-IPO निवेशकों को औसतन 5% का नुकसान हुआ, जबकि IPO और पोस्ट-IPO निवेशकों को क्रमशः 6% और 25% तक का घाटा झेलना पड़ा.
सिर्फ सही बिजनेस मॉडल वाली कंपनियों में ही करें निवेश
Client Associates की रिपोर्ट कहती है कि जिन कंपनियों के पास साफ-सुथरा और सही मनी बनाने वाला बिजनेस मॉडल था, वही लंबे समय में निवेशकों को फायदा दे पाईं. मतलब, जिनका मुनाफा बढ़ रहा था और उनका बिजनेस बड़ा हो सकता था, वे टिके रहे. खासकर कैपिटल-लाइट कंपनियां जैसे ज़ोमैटो और नजारा ने मार्केट के उतार-चढ़ाव को बेहतर तरीके से झेला. वहीं, जिन कंपनियों पर खर्चा ज्यादा था, उन्हें ज्यादा दिक्कत हुई. रिपोर्ट बताती है कि 2020-21 में जब मार्केट में बहुत पैसा और रिटेल निवेशक आए थे, तब IPO की कीमतें बहुत बढ़ गई थीं, लेकिन अब वो दौर खत्म हो गया है. 2024-25 में मार्केट का ध्यान अब मुनाफे, कैश फ्लो और सही गवर्नेंस पर है.



