Vedant Samachar

अब घर बैठे रेस्टोरेंट जैसी कीमत पर मिलेगा खाना, लॉन्च हुआ ये नया ऐप!

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ऑनलाइन खाना मंगवाने की आदत अब हर शहर में आम हो चुकी है. लेकिन एक शिकायत हर किसी की जुबान पर रहती है कि ऑर्डर करते समय मेन्यू में जो दाम दिखता है, बिल आने तक वह बढ़ जाता है. प्लेटफॉर्म फीस, पैकेजिंग चार्ज और टैक्स मिलकर जेब पर भारी पड़ते हैं. अब राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म रैपिडो ने इस परेशानी का हल निकालने की कोशिश की है. कंपनी ने फूड डिलीवरी के लिए अपना नया स्टैंडअलोन ऐप ओनली लॉन्च किया है, जिसमें दावा है कि खाना आपको उसी कीमत पर मिलेगा, जो रेस्टोरेंट में जाकर देने पर चुकानी पड़ती है.

फिलहाल यह सर्विस बेंगलुरु के कुछ इलाकों (कोरमंगला और HSR लेआउट) में शुरू की गई है. गूगल प्ले स्टोर पर यह ऐप उपलब्ध है. लॉन्च से पहले कंपनी ने कई हफ्तों तक अपने कर्मचारियों के बीच इसका ट्रायल किया, ताकि ग्राहकों को शुरुआत से ही बेहतर अनुभव मिल सके.

कम दाम में मिलेगा खाना
ओनली ऐप का फोकस 150 रुपये से कम कीमत वाले खाने पर है. खास तौर पर उत्तर भारतीय भोजन जैसे चपाती, चावल, अंडे और अन्य साधारण डिश यहां 100 रुपये से भी कम में मिलेंगे. कंपनी ने इसे जीरो-कमीशन प्लेटफॉर्म बताया है, यानी रेस्टोरेंट से कोई अतिरिक्त कमीशन नहीं लिया जाएगा. इसका फायदा सीधे ग्राहक को मिलेगा, क्योंकि ऑनलाइन ऑर्डर करने पर भी कीमत ऑफलाइन जैसी ही रहेगी.

शुरुआती चरण में प्लेटफॉर्म फीस, पैकेजिंग कॉस्ट और ऑनलाइन मेन्यू की बढ़ी हुई कीमतों जैसे अतिरिक्त चार्ज यहां नहीं जोड़े जाएंगे. कीमत को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए कंपनी फिलहाल डिलीवरी की कुछ लागत खुद उठाएगी, ताकि ग्राहक बिना झिझक के ऐप आजमा सकें.

डिलीवरी फीस का सीधा हिसाब
ओनली का डिलीवरी मॉडल साफ और आसान है. छोटे ऑर्डर पर 20 रुपये, मध्यम पर 25 रुपये और बड़े ऑर्डर पर 50 रुपये की तय फीस है. ऐप में यह भी लिखा है कि 99 रुपये से ज्यादा के ऑर्डर पर केवल जीएसटी और तय डिलीवरी फीस ही लगेगी. शुरुआत में रैपिडो खुद कुछ खर्च वहन करेगी, ताकि कीमत और आकर्षक रहे और ग्राहक जुड़ते जाएं.

रैपिडो के पास है तगड़ा नेटवर्क
रैपिडो पहले से ही 500 से ज्यादा शहरों में अपनी बाइक टैक्सी सर्विस चला रही है. हर महीने 40 लाख राइड्स और 3 करोड़ मंथली एक्टिव यूजर्स के साथ कंपनी के पास पहले से एक बड़ा नेटवर्क मौजूद है. अब इसी नेटवर्क का इस्तेमाल फूड डिलीवरी के लिए भी किया जाएगा. इससे न सिर्फ डिलीवरी का समय घटेगा, बल्कि नए राइडर्स की भर्ती पर अतिरिक्त खर्च भी नहीं करना पड़ेगा. कंपनी का मानना है कि अगर खाने की कुल लागत कम रखी जाए, तो लोग ऑनलाइन ऑर्डर करने के लिए ज्यादा उत्साहित होंगे.

जोमैटो-स्विगी को मिलेगी चुनौती
भारत का फूड डिलीवरी बाजार करीब 8 अरब डॉलर का है और इसमें फिलहाल जोमैटो और स्विगी का दबदबा है. दोनों मिलकर रोजाना 45 लाख से ज्यादा डिलीवरी करती हैं. ऐसे माहौल में ऑफलाइन जैसी कीमत पर ऑनलाइन खाना देने का ओनली का मॉडल ग्राहकों के लिए एक नया और किफायती विकल्प बन सकता है. फिलहाल बेंगलुरु को टेस्ट लोकेशन के रूप में चुना गया है. अगर यहां यह मॉडल सफल रहा, तो कंपनी इसे जल्द ही अन्य शहरों में भी शुरू करने की योजना बना रही है.

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