Vedant Samachar

जोड़ों का दर्द कब बन सकता है गंभीर बीमारी का लक्षण

Vedant Samachar
4 Min Read

बरसात का मौसम हो या ठंड का, जोड़ों की दर्द की समस्या कई लोगों को परेशान करती है. सुबह उठने पर घुटनों में जकड़न, हाथ-पैरों में दर्द रहना या लंबे समय तक बैठे रहने के बाद उठने पर अचानक से जोड़ों में तेज दर्द महसूस होना सामान्य लग सकता है लेकिन कभी-कभी ये गंभीर बीमारी का संकेत होता है. कई लोगों को लगता है कि ये सिर्फ उम्र बढ़ने या मौसम बदलने के कारण होता है लेकिन ऐसा नहीं है. इसके पीछे के कारणों को जानना बेहद जरूरी है.

जोड़ों में दर्द होने पर लोग घरेलू नुस्खों और देशी दवाओं से आराम पाने की कोशिश करते हैं. घरेलू नुस्खों से थोड़ा आराम जरूर मिलता है लेकिन परेशानी जड़ से खत्म नहीं होती. इसके लिए इन जोड़ों के दर्द का सही इलाज करना जरूरी है. ताकि समय रहते बीमारी का पता चले और जोड़ों को गंभीर समस्या न हो.

एम्स दिल्ली में प्रोफेसर डॉ. उमा कुमार बताती हैं कि जोड़ों में दर्द कई कारणों से हो सकता है. चोट लगना, ज्यादा वर्कआउट, पोषण की कमी, शरीर में कैल्शियम-विटामिन डी का स्तर कम होना. लेकिन असली खतरा तब शुरू होता है जब ये दर्द सूजन, लालिमा, सुबह उठने पर कठोरता या चलने-फिरने में मुश्किल के साथ जुड़ जाता है. ये लक्षण इस बात का संकेत हो सकते हैं कि आपकी इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी है या फिर कोई इंफेक्शन, गठिया (Arthritis) या ऑटोइम्यून डिजीज (जैसे रूमेटॉयड अर्थराइटिस, ल्यूपस) का शुरुआती चरण है.

किन लक्षणों पर ध्यान दें

दर्द के साथ बुखार

थकान, वजन कम होना

स्किन पर चकत्ते हो जाना

दर्द की जगह पर सूजन और लालिमा

उठने-चलने पर तेज दर्द होना

आपको बता दें कि अगर दर्द के साथ ऊपर लिखे लक्षण 4 से 6 सप्ताह तक बने रहे तो या लगातार दर्द और लक्षण बढ़ने लगे तो तुरंत रूमेटोलॉजिस्ट से जांच करानी चाहिए. रूमेटोलॉजिस्ट उन डॉक्टर्स को कहा जाता है जो मस्कुलोस्केलेटल और ऑटोइम्यून बीमारियों का उपचार करते हैं. इन बीमारियों में आमतौर पर जोड़ों, मांसपेशियों में दर्द के साथ टिश्यूज में दिक्कत होती है.

किन बीमारियों का खतरा

1 रूमेटॉयड अर्थराइटिस

ये एक ऑटोइम्यून बीमारी है. इसमें हमारे शरीर की इम्यून सिस्टम गलती से अपने ही जोड़ों पर हमला करने लगती है. नतीजा- जोड़ों में सूजन, दर्द, लालिमा और सुबह-सुबह जकड़न महसूस होती है. अगर समय रहते इलाज न हो तो ये हड्डियों और जोड़ों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है.

2 सोरियाटिक आर्थराइटिस

ये बीमारी उन लोगों में ज्यादा देखी जाती है जिन्हें सोरायसिस नाम की स्किन प्रॉब्लम होती है. इसमें त्वचा पर लाल और पपड़ीदार चकत्ते तो बनते ही हैं, साथ ही जोड़ों में भी दर्द और सूजन शुरू हो जाती है. ये हाथ-पैर, घुटने और रीढ़ की हड्डी तक को प्रभावित कर सकती है.

3 ऑस्टियोआर्थराइटिस

ये ज्यादातर उम्र बढ़ने या जोड़ों पर ज्यादा दबाव पड़ने के कारण होता है. इसमें हड्डियों के बीच मौजूद कार्टिलेज (नरम गद्दी) धीरे-धीरे घिसने लगती है. इस वजह से हड्डियां आपस में रगड़ खाने लगती हैं, जिससे दर्द, सूजन और चलने-फिरने में मुश्किल होती है.

जोड़ों के दर्द से बचाव के लिए क्या करें

नियमित व्यायाम करें


तला भुना, पैकेट वाले खाने से दूर रहें


ओमेगा-3 वाले खाने का डाइट में शामिल करें


शराब और धूम्रपान को तुरंत छोड़ें


पानी खूब पीएं, शरीर को हाइड्रेट रखें


वजन को कंट्रोल करें


पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम-विटामिन डी लें


जोड़ों पर अधिक दबाव न डालें


डॉक्टर से जांच कराकर फिजियोथेरेपी अपनाएं

Share This Article