लखन गोस्वामी/कोरबा, 13 अगस्त (वेदांत समाचार)। मानदेय शिक्षक भर्ती में नियम विरुद्ध जाकर किया नियुक्ति, मामला जिला शिक्षा अधिकारी के संज्ञान में आने पर भी नहीं किया गया कोई कार्यवाही, गलत नियुक्ति पर शिक्षा विभाग की मौन सहमति, आखिर क्या हो सकती है वजह?
मामला कोरबा विकासखंड के शा. उच्च. मा. विद्यालय बरपाली (जिल्गा) का है। जहाँ मानदेय शिक्षक का एक पद शिक्षा विभाग द्वारा जारी किया गया था जिसमें शिक्षक नियुक्ति की जिम्मेदारी शाला प्रबन्ध समिति और विद्यालय के प्राचार्य को दी गई थी। मानदेय शिक्षक की नियुक्ति के लिए शिक्षा विभाग द्वारा एक गाईड लाइन जारी की गई थी जिसका पालन करते हुए ही मानदेय शिक्षक की नियुक्ति किये जाने का निर्देश सभी विद्यालयों के संस्था प्रमुखों को जारी किया गया था। किंतु शा. उच्च. मा. विद्यालय बरपाली (जिल्गा) में शाला प्रबंध समिति के अध्यक्ष रामजीवन कंवर और संस्था के प्राचार्य श्रीमती अनामिका सिंह द्वारा अपनी मनमानी करते हुए मानदेय शिक्षक भर्ती के लिए जारी किए गए गाईड लाइन को दरकिनार कर अपात्र अभ्यर्थी की नियुक्ति कर दी गई। समिति के अध्यक्ष और प्राचार्य द्वारा मिलीभगत करते हुए ग्राम पंचायत के उपसरपंच की पुत्री को लाभ दिलाने के उद्देश्य से मानदेय शिक्षक नियुक्त कर दिया गया जबकि वह उक्त पद के लिए अपात्र थी और पात्र अभ्यर्थियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। सारी जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी को होते हुए भी उनके द्वारा इस मामले में कोई भी कार्यवाही नहीं की गई।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पात्र अभ्यर्थियों द्वारा इसकी शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी के पास किया जाना था किंतु शाला प्रबंध समिति के अध्यक्ष रामजीवन कंवर द्वारा पात्र अभ्यर्थियों को भय दिखाकर शिकायत करने से रोक दिया गया।




