Vedant Samachar

“भारत का ब्रम्हास्त्र” S-400, जाने इसकी खासियत…

Vedant Samachar
4 Min Read

ऑपरेशन सिंदूर के 3 महीने बाद भारतीय वायुसेना (IAF) ने पहली बार सार्वजनिक रूप से उस बड़े हमले का खुलासा किया है, जिसे सैन्य अधिकारी आधुनिक हवाई युद्ध के इतिहास में अभूतपूर्व मानते हैं। बेंगलुरु में एक व्याख्यान के दौरान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने बताया कि 7 मई को पाकिस्तान का एक बड़ा हवाई प्लेटफार्म लगभग 300 km की दूरी से मार गिराया गया। यह संभवतः इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस (ELINT) या एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) विमान हो सकता है।

उन्होंने इसे अब तक की सबसे लंबी दूरी से दर्ज सतह-से-आकाश में मारने वाली घटना बताया है। वायुसेना चीफ ने स्पष्ट किया कि “300 किमी की दूरी पर यह रिकॉर्ड किसी विमान के आकार को लेकर नहीं, बल्कि दूरी के लिहाज से है।” ऐसे हमलों की पुष्टि अक्सर कठिन होती है क्योंकि मलबा दुश्मन देश की सीमा में गिरता है और स्वतंत्र रूप से सत्यापन संभव नहीं होता।

मामले में वायुसेना प्रमुख का बयान इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग के जरिए पुष्टि के बाद ही दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, “हमारे पास इलेक्ट्रॉनिक तरीके हैं जिससे हम किसी लक्ष्य को गिराने की पुष्टि कर सकते हैं। रडार पर एक ब्लिप दिखाई देता है और फिर गायब हो जाता है।”

300 किमी दूरी क्यों खास ?
इतनी लंबी दूरी से किसी हवाई लक्ष्य को गिराने के लिए सिर्फ लंबी दूरी के इंटरसेप्टर मिसाइल (Surface-to-Air Missile – SAM) ही नहीं, बल्कि सटीक ट्रैकिंग, स्थिर टार्गेट लॉक और लक्ष्य तक हथियार की निरंतर मार्गदर्शन क्षमता की जरूरत होती है। भारतीय वायुसेना ने यह क्षमता हाल ही में रूसी S-400 प्रणाली के आगमन के साथ हासिल की है। अधिकारियों के मुताबिक S-400 प्रणाली की 400 km तक की मारक क्षमता ने पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को इतनी दूरी पर रोक दिया कि वे लंबी दूरी के ग्लाइड बम का भी इस्तेमाल नहीं कर सके।

दुनिया के लिए मिसाल

हाल के संघर्षों में इतनी लंबी दूरी के बावजूद सतह-से-आकाश में सफल हमलों के मामले बहुत कम सामने आए हैं। फरवरी 2024 में यूक्रेन ने दावा किया कि उसने रूस के A-50 जासूसी विमान को 200 km से अधिक दूरी पर गिराया। फरवरी 2022 में यूक्रेन का एक SU-27 लड़ाकू विमान रूसी S-400 से लगभग 150 km की दूरी पर गिरा। 300 km की दूरी से इस तरह का हमला सार्वजनिक रूप से दर्ज होना दुनिया के लिए मिसाल है।

भारत को रूस से अब तक 5 में से 3 S-400 यूनिट मिल चुकी हैं, जिन्हें पाकिस्तान और चीन की सीमा पर तैनात किया गया है। बाकी 2 यूनिट 2025–26 तक मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों ने इसकी तुलना ऐसी टॉर्च से की जो सीमा से कई किलोमीटर अंदर तक देख सकती है।

ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में S-400 के साथ-साथ बराक-8 मीडियम रेंज SAM और स्वदेशी आकाश मिसाइल प्रणाली ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हाल ही में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने S-400 के लिए व्यापक वार्षिक रखरखाव अनुबंध को मंजूरी दी है।

CAATS Act. और S-400 डील
भारत ने S-400 सौदा 2018 में रूस के साथ किया था, ठीक 1 साल बाद जब अमेरिका ने CAATS Act. लागू किया था। यह कानून रूस, ईरान या उत्तर कोरिया से बड़े रक्षा सौदे करने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है।

Share This Article