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सरकारी और निजी स्कूल के 10 शिक्षकों की लापरवाही, नही कर सकेंगे मूल्यांकन…

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20 से 49 अंक बढ़ाये, बोर्ड ने की कार्रवाई

कोरबा,13अगस्त (वेदांत समाचार)। माध्यमिक शिक्षा मंडल के द्वारा आयोजित बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए सरकारी और प्रायवेट स्कूल के शिक्षकों को दायित्य दिया जाता हैं। उनसे अपेक्षा की जाती है कि मॉडल आदर्श उत्तर के हिसाब से कापियां जांचे और परीक्षार्थियों को अंक दे।

इसके विरूद्ध हड़बड़ी कहें या लापरवाही, अनेक शिक्षक कुछ ज्यादा ही उत्साह दिखा देते हैं। बोर्ड ने वर्ष 2024-25 की मुख्य परीक्षा के सिलसिले में मूल्यांकन में गंभीर त्रुटि करने पर कोरबा जिले के 10 शिक्षकों के खिलाफ कार्यवाही की। उन्हें दो श्रेणियों में 3 से 5 वर्ष तक मूल्यांकन कार्य से अलग कर दिया है।

वेतनवृद्धि रोकने की कार्यवाही उन मामलों में की गई है जिनमें संबंधित शिक्षक सरकारी विद्यालय के है। खबर के आनुसार कोरबा जिले के 10 शिक्षक इस बार गैर जिम्मेदाराना तरीके से उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन करने के मामले में उच्चाधिकारियों की नजर में आए। उन्होंने आपने अपने विषय की कापियां जो दूसरे जिलों से आई थी, का मूल्यांकन स्थानीय केन्द्र में किस तरीके से किया, इसका पता इस बात से चलता है कि अनेक परीक्षार्थियों के मामले में 20 से 40 और 49 अंक तक बढ़ गए।

मुख्य परीक्षा के बाद आगे की प्रक्रिया को लेकर दावे आपत्ति में जब ऐसी कापियों की जांच की गई तो इस लापरवाही का खुलासा हुआ। माध्यमिक शिक्षा मंडल के द्वारा प्रदेश के कुल 36 मूल्यांकन केन्द्रों में ऐसी त्रुटि की पतासाजी करने पर ज्ञात हुआ कि श्रेणी-1 में 59, श्रेणी-2 में 9, श्रेणी-3 में 1 शिक्षक ने इस तरह से 69 शिक्षकों ने लापरवाही की।माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर द्वारा घोषित की गई सूची के अनुसार कोरबा जिले से श्रेणी 1 जिसमें 20 से 40 अंक बढ़ गए, इसमें सरकारी स्कूल पोड़ीबहार की व्याख्याता गीता वैष्णव, सरकारी स्कूल नवापारा के शिक्षक घासीराम लोनिया, निर्मला अंग्रेजी स्कूल कोरबा की व्याख्याता प्रतिभा यादव, सरस्वती रजगामार के शिक्षक रमेश चौहान, बीकन दर्री के शिक्षक धनेश्वर सिंह, बालको टाउनशिप की शिक्षिका खिलेश्वरी केंवट, बालकोनगर की शिक्षिका प्रेरणा तिवारी, भिलाईबाजार सरकारी विद्यालय की शिक्षिका सरोज टोप्पो और सरकारी विद्यालय मुनगाडीह पाली के शिक्षक बाबूलाल भुनेश्वर के नाम शामिल हैं।

इन्होंने हिन्दी, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान और गणित विषयों के मूल्यांकन में लापरवाही बरतते हुए परीक्षार्थियों पर मेहरबानी की। इन्हें 3 वर्ष के लिए मूल्यांकन से अलग कर दिया गया है। जबकि रामायण सिंह कंवर व्याख्याता पठियापाली कोरबा को दूसरी श्रेणी में मूल्यांकन कार्य से 5 वर्ष के लिए पृथक किया गया है। कहा गया कि 41 से 49 नंबर उन्होंने अपने विषय में कतिपय मामलों में बढ़ाए। जबकि तीसरी श्रेणी जिसमें 50 से अधिक अंक की अनावश्यक बढ़ोत्तरी को शामिल किया गया है, कोरबा जिले का कोई मामला नहीं है।

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