प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 20वीं किस्त के वितरण के शुभ अवसर पर पटना में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विशाल किसान समुदाय को संबोधित किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की किसान-हितैषी नीतियों को रेखांकित किया।
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
इस अवसर पर बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा, सहकारिता मंत्री प्रेम कुमार और कई वरिष्ठ अधिकारी भी मंच पर मौजूद थे। सावन के पवित्र महीने में इस आयोजन ने एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक छटा भी बिखेरी।
किसानों को किया सम्मानित
अपने संबोधन में श्री चौहान ने विशेष रूप से उपस्थित महिला किसानों की सराहना करते हुए कहा, “किसान भारत की आत्मा हैं, और उनकी सेवा करना मेरा परम धर्म है।” उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था में कृषि के योगदान को केंद्र में रखा।
बिहार की कृषि परंपरा की प्रशंसा
उन्होंने बिहार की ऐतिहासिक विरासत, भगवान बुद्ध की तपोभूमि और गंगा की पुण्यभूमि को नमन करते हुए कहा कि यह राज्य ज्ञान और श्रम का प्रतीक है। उन्होंने चंपारण सत्याग्रह की ऐतिहासिक भूमिका को भी याद किया।
₹20,000 करोड़ की राशि सीधे खातों में
इस अवसर पर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त के रूप में ₹20,000 करोड़ से अधिक की राशि देशभर के किसानों के खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी गई। योजना के तहत अब तक ₹3.77 लाख करोड़ से अधिक वितरित किए जा चुके हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाना है। उन्होंने प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना, मखाना उत्पादन में बिहार की भागीदारी और खेती से विज्ञान को जोड़ने के प्रयासों पर बल दिया।
खाद, MSP और बीमा योजनाएं
केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि किसानों को खाद, कीटनाशक और बीज समय पर मिलेंगे, और फसल नुकसान की भरपाई बीमा योजनाओं से सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर फसलों की खरीद में अब उत्पादन लागत पर 50% अतिरिक्त लाभ जोड़ा जाता है।
बदलाव का नया युग
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की उस नीति को दोहराया जिसमें 1 रुपये भेजने पर पूरा 1 रुपया सीधे किसान के खाते में पहुंचता है। पहले की व्यवस्था में यह पैसा बिचौलियों के पास चला जाता था।
कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का समापन किसानों को सशक्त बनाने और भारत की कृषि को आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ हुआ। श्री चौहान ने कहा, “किसानों का कल्याण ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।”



