फेफड़ों से जुड़ी दो गंभीर बीमारियां हैं, लंग्स कैंसर और टीबी यानी ट्यूबरकुलोसिस. टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया के कारण होती है. यह खासकर उन लोगों को प्रभावित करती है जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है. लंग्स कैंसर एक प्रकार का कैंसर है जिसमें फेफड़ों के सेल्स असामान्य तरीके से बढ़ने लगते हैं और ट्यूमर का रूप ले लेते हैं. इसका मुख्य कारण धूम्रपान, वायु प्रदूषण और जेनेटिक फैक्टर हो सकते हैं. हालांकि दोनों बीमारियां फेफड़ों को प्रभावित करती हैं, लेकिन इनके कारण, लक्षण और इलाज की प्रक्रिया अलग होती है. सही समय पर जांच और इलाज न होने पर दोनों ही जानलेवा साबित हो सकते हैं.
टीबी और लंग्स कैंसर दोनों ही फेफड़ों के कामकाज को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं. टीबी की वजह से फेफड़ों में संक्रमण, गांठ या कैविटी बन सकती है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है और शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है यह संक्रमण खून और लिम्फैटिक सिस्टम के जरिए शरीर के अन्य अंगों तक भी फैल सकता है. वहीं, लंग्स कैंसर में कैंसरस सेल्स धीरे-धीरे फेफड़ों की स्वस्थ सेल्स को नष्ट कर देती हैं. इससे खांसी, सीने में दर्द, थकान, वजन घटना और सांस की तकलीफ जैसी समस्याएं पैदा होती हैं. अगर कैंसर फैल जाए, तो यह दिमाग, हड्डी और लिवर जैसे अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है. दोनों ही स्थितियों में व्यक्ति के लाइफस्टाइल पर गहरा असर पड़ता है.
लंग्स कैंसर और टीबी के लक्षणों में क्या अंतर है?
दिल्ली के मूलचंद अस्पताल में पल्मोनोलॉजी विभाग में डॉ भगवान मंत्री बताते हैं किलंग्स कैंसर और टीबी के कुछ लक्षण एक जैसे हो सकते हैं, जैसे कि लगातार खांसी, सीने में दर्द, थकान, और वजन कम होना. लेकिन इनके बीच कुछ स्पष्ट अंतर भी होते हैं. टीबी में आमतौर पर खांसी के साथ बलगम आता है, जिसमें खून भी हो सकता है. बुखार, रात को पसीना आना और भूख कम लगना इसके विशेष लक्षण हैं. यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और इसका इलाज लंबा चलता है.
वहीं लंग्स कैंसर की खांसी शुरू में सूखी हो सकती है, लेकिन धीरे-धीरे खून आ सकता है. सीने में लगातार दर्द, सांस फूलना, और अचानक वजन कम होना इसके मुख्य संकेत हैं. इसके अलावा आवाज में भारीपन, बार-बार सांस संबंधी इन्फेक्शन होना और हड्डियों में दर्द जैसे संकेत भी देखे जा सकते हैं. टीबी एक संक्रमण है और इसका इलाज एंटीबायोटिक्स से संभव है, जबकि लंग्स कैंसर में कीमोथेरेपी, रेडिएशन और सर्जरी जैसी प्रोसेस अपनाई जाती हैं. इसलिए सही जांच के बाद ही यह तय किया जा सकता है कि मरीज को कौन-सी बीमारी है.
कैसे करें बचाव?
धूम्रपान से बचें और तंबाकू का सेवन न करें.
समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराएं, खासकर अगर लगातार खांसी हो.
टीबी से बचाव के लिए BCG टीकाकरण करवाएं.
संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखें और मास्क पहनें.
पोषणयुक्त डाइट लें और इम्युनिटी मजबूत रखें.
वेंटिलेशन वाले स्थानों में रहें, ताकि शुद्ध हवा मिलती रहे.
किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से सलाह लें.



