रिटायरमेंट के बाद कैसे घर का खर्च चलेगा, इसकी टेंशन सभी लोगों को होती है. दरअसल पहले जो सरकारी कर्मचारी होते थे, उन्हें रिटायरमेंट के बाद सरकार की ओर से पेंशन मिलती थी. जबकि अब सरकारी कर्मचारियों को कोई पेंशन नहीं मिलती है. वहीं प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों को न पहले पेंशन मिलती थी और न अब पेंशन मिलती है. एक रिपोर्ट के अनुसार आज के समय में रिटायरमेंट के बाद का खर्च चलाने के लिए आपके पास कम से कम 3.5 करोड़ रुपए का फंड होना चाहिए. अगर आपको भी अपने रिटायरमेंट की टेंशन है तो इसके बारे में हम आपको विस्तार से बता रहे हैं.
HSBC की एक रिपोर्ट में हुआ खुलासा
HSBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लोगों को अपनी रिटायरमेंट आराम से गुजारने के लिए करीब 3.5 करोड़ रुपए (लगभग 4 लाख अमेरिकी डॉलर) की बचत करनी होगी. एफ्लुएंट इन्वेस्टर्स स्नैपशॉट 2025 नाम की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अब भारतीय निवेशक बढ़ती महंगाई, लंबी उम्र और जीवन यापन के खर्च को लेकर पहले से ज्यादा सजग हो रहे हैं. यही वजह है कि देश में रिटायरमेंट प्लानिंग को नए सिरे से देखा जा रहा है.
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अभी भी बहुत से लोग घूमने-फिरने, पढ़ाई या घर खरीदने जैसे छोटे लक्ष्य पहले पूरा करना चाहते हैं, लेकिन अब कई लोग लंबी अवधि की आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने लगे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, अभी ज्यादातर लोगों के पास मैनेज्ड इन्वेस्टमेंट, शेयर और सोना जैसे निवेश सबसे ज्यादा हैं. इसके साथ ही लोग नए निवेश विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं.
भारतीय करते हैं यहां पर निवेश
HSBC ने कहा, भारत के निवेशक महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता को लेकर चिंतित हैं, लेकिन ग्लोबल स्तर पर देखें तो वे अपने वित्तीय लक्ष्य पाने को लेकर काफी आत्मविश्वासी भी हैं. भारतीय निवेशक प्रॉपर्टी में निवेश, परिवार की आर्थिक मदद और अपनी भलाई के लिए बचत को सबसे ज्यादा अहमियत देते हैं.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2025 में औसतन निवेश के हिसाब से देखा जाए तो पिछले एक साल में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी सोने में निवेश की गई. इसके बाद दूसरे विकल्पों में निवेश बढ़ा. वहीं, निवेशकों की नकद राशि की हिस्सेदारी घटकर 15% रह गई है और आने वाले साल में इसे लेकर कोई स्पष्ट राय नहीं बन पाई है.
30 की उम्र तक बना ले रिटायरमेंट की प्लानिंग
HSBC ने जल्दी योजना बनाने की अहमियत भी बताई. जो लोग अपने 30 की उम्र में ही रिटायरमेंट की तैयारी शुरू कर देते हैं, वे ज्यादा आत्मविश्वासी रहते हैं, जबकि देर से शुरुआत करने वालों को रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी में समझौता करने का डर रहता है.
भारत की चिंताएं दुनिया के दूसरे देशों से मिलती-जुलती हैं, लेकिन हर देश में जरूरत और तैयारी अलग-अलग है. जैसे सिंगापुर में आराम से रिटायरमेंट के लिए औसतन 1.39 मिलियन अमेरिकी डॉलर की जरूरत होती है, वहीं हॉन्गकॉन्ग में यह आंकड़ा करीब 1.1 मिलियन अमेरिकी डॉलर है.इसी तरह अमेरिका में औसतन 1.57 मिलियन अमेरिकी डॉलर और चीन में करीब 1.09 मिलियन अमेरिकी डॉलर बचाकर ही लोग अपनी रिटायरमेंट को सुरक्षित और आरामदायक मानते हैं.



