आज की तेज़ रफ्तार और तनाव से भरी ज़िंदगी में मानसिक स्वास्थ्य एक बड़ी चुनौती बन चुका है. डिप्रेशन, एंग्जायटी, अकेलापन और स्ट्रेस जैसी समस्याएं हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर रही हैं. ऐसे में सवाल उठता है क्या कोई ऐसा प्राकृतिक तरीका है जो हमारे दिमाग को शांत कर सके और मानसिक बीमारियों से लड़ने में मदद कर सके? रिसर्च और न्यूरोलॉजिकल साइंस कहता है- हां. वो तरीका है पालतू जानवर पालना.
पालतू जानवर हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक दवा जैसे होते हैं वो भी बिना किसी डॉक्टर के पर्चे के. वे हमारे सबसे वफादार दोस्त होते हैं, जो हमारी भावनाओं को बिना शब्दों के समझते हैं. यदि आप मानसिक रूप से थके हुए हैं, अकेलापन महसूस कर रहे हैं या दिनचर्या में कोई पॉजिटिव चीज़ जोड़ना चाहते हैं- तो एक पालतू जानवर अपनाना एक शानदार फैसला हो सकता है.
क्यों जरूरी हैं पालतू जानवर?
पालतू जानवर जैसे कुत्ते, बिल्ली, खरगोश या तोते सिर्फ हमारे घर की शोभा नहीं बढ़ाते, बल्कि ये हमारे दिल और दिमाग दोनों को सुकून देते हैं. जब हम किसी पालतू जानवर को प्यार करते हैं, उसे दुलारते हैं या उसके साथ खेलते हैं, तो हमारे दिमाग से ऑक्सिटोसिन नामक हार्मोन रिलीज़ होता है, जिसे ‘लव हार्मोन’ कहा जाता है. यह हार्मोन स्ट्रेस को कम करता है, मूड को बेहतर बनाता है और मानसिक स्थिरता लाता है.
अकेलेपन का इलाज
गाजियाबाद के जिला अस्पताल में मानसिक रोग विभाग में डॉ. एके कुमार बताते हैं किशहरों में अकेलेपन की समस्या बहुत आम है. खासकर बुजुर्गों और सिंगल लोगों में यह भावनात्मक रूप से तोड़ने वाला हो सकता है. लेकिन जब आपके पास एक पालतू जानवर होता है, तो आपको एक साथी मिलता है. वो बिना बोले आपकी भावनाओं को समझता है. कई बार लोगों को लगता है कि कोई उन्हें नहीं समझता, लेकिन उनका पालतू जानवर बस उनकी गोद में आकर बैठ जाता है और यही बहुत कुछ कह जाता है.
न्यूरोलॉजी क्या कहती है?
न्यूरोलॉजिकल स्टडीज़ बताती हैं कि पालतू जानवरों के साथ समय बिताने से ब्रेन की न्यूरोन एक्टिविटी बेहतर होती है. जो लोग डिप्रेशन या PTSD जैसी मानसिक समस्याओं से जूझ रहे होते हैं, उनके लिए थेरपी डॉग्स या इमोशनल सपोर्ट एनिमल्स बहुत कारगर साबित हुए हैं. रिसर्च में ये भी पाया गया है कि पालतू जानवरों के साथ सिर्फ 15 मिनट बिताने से ही ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट दोनों कम हो सकते हैं जो कि मानसिक शांति की दिशा में पहला कदम होता है.
बच्चों और टीनएजर्स पर असर
आज के बच्चे भी स्ट्रेस और स्क्रीन टाइम से प्रभावित हो रहे हैं. एक पालतू जानवर उन्हें संवेदनशीलता, ज़िम्मेदारी और प्यार देना सिखाता है. यह भावनात्मक रूप से उन्हें मजबूत बनाता है और सोशल स्किल्स भी बेहतर करता है.
पालतू जानवर रखना थैरेपी जैसा
पालतू जानवर रखना एक तरह की नेचुरल थेरेपी है . बिना किसी साइड इफेक्ट के. यह ना सिर्फ दिमागी शांति देता है, बल्कि फिजिकल एक्टिविटी को भी बढ़ावा देता है, खासकर जब आप उन्हें टहलाने ले जाते हैं या उनके साथ खेलते हैं. एक मजबूत रूटीन बनता है और दिनचर्या में एक उद्देश्य जुड़ता है.



