Vedant Samachar

पाकिस्तान की शर्मनाक नाकामी: शाहीन-3 न्यूक्लियर मिसाइल टेस्ट में फेल, बलूचिस्तान में गिरने से मचा हड़कंप

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भारत से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान करारी शिकस्त खाने के बाद पाकिस्तान अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसमें भी उसे मुंह की खानी पड़ी। पाकिस्तान ने 22 जुलाई को अपनी परमाणु क्षमता वाली शाहीन-3 मिसाइल का परीक्षण किया, जो टेस्ट के दौरान ही फेल हो गई और बलूचिस्तान की आबादी के पास खेतों में जाकर गिर पड़ी।

स्थानीय लोगों में आक्रोश
यह घटना बलूचिस्तान प्रांत के ग्रापन की घाटी के पास हुई। वहां के लोग इस घटना से बहुत नाराज़ हैं और कह रहे हैं कि अगर मिसाइल ज़रा भी दिशा से भटक जाती तो भारी जान-माल का नुकसान हो सकता था। बलूच नेता मीर यार बलोच ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की इस हरकत की कड़ी निंदा की और कहा कि पाकिस्तान बलूचिस्तान की जमीन का गलत इस्तेमाल कर रहा है।

क्या बोले बलूच नेता?
मीर यार बलोच ने कहा, “पाकिस्तान बार-बार बलूचिस्तान की सीमा में खतरनाक मिसाइल परीक्षण कर रहा है, जो यहां के लोगों की ज़िंदगी को खतरे में डालते हैं। यह न केवल स्थानीय संप्रभुता का उल्लंघन है, बल्कि एक अमानवीय और गैर-जिम्मेदाराना हरकत है।” उन्होंने ये भी कहा कि पाकिस्तान बलूच लोगों को डराकर, धमकाकर उनके घरों से बेदखल कर रहा है, ताकि वो मिसाइल और सैन्य परीक्षणों के लिए खाली ज़मीन का इस्तेमाल कर सके।

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
बलूच नेता ने याद दिलाया कि अक्टूबर 2023 में भी एक मिसाइल पंजाब से दागी गई थी, जो डेरा बुगती के खेतों में जा गिरी थी। इससे पहले 28 मई 1998 को पाकिस्तान ने बलूचिस्तान के चग़ाई ज़िले में 6 परमाणु परीक्षण किए थे, जिनके कारण वहां के लोगों को आज भी रेडिएशन, कैंसर और त्वचा रोग जैसी गंभीर समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग
बलूच नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाओं से मांग की है कि पाकिस्तान पर हथियार और मिसाइल परीक्षणों पर प्रतिबंध लगाया जाए। बलूचिस्तान में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों की निष्पक्ष जांच की जाए,और विस्थापित हो रहे लोगों की सुरक्षा और पुनर्वास की निगरानीकी जाए। बलूच नेताओं ने कहा कि वे शांति, न्याय और स्वतंत्रता के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की उम्मीद करते हैं।

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