Vedant Samachar

PWD के भ्रष्टाचारी EE और डिप्टी EE को 3 साल की सज़ा, लगभग 3 करोड़ का किया था गबन…

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दंतेवाड़ा,20जुलाई(वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के एक बड़े प्रकरण में विशेष न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। करीब 15 साल पुराने मामले में 2 लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को दोषी पाया गया है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय कुमार होता, विशेष न्यायाधीश, दंतेवाड़ा ने इस महत्वपूर्ण फैसले में चोवाराम पिस्दा और ज्ञानेश कुमार तारम को दोषी करार दिया है। इस मामले में साल 2010-11 से सुनवाई की जा रही थी।

लोक निर्माण विभाग सुकमा में पदस्थ कार्यपालक अभियंता चोवाराम पिस्दा और कोन्टा के उप अभियंता एवं प्रभारी SDO ज्ञानेश कुमार तारम ने एक सड़क निर्माण योजना में भारी अनियमितता की थी। न्यायालय द्वारा भारतीय दंड साहिता की अलग-अलग धराओं के तहत दोनों आरोपियों को 3 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

क्या है पूरा मामला ?
साल 2010-11 में LWE योजना के तहत चिंतलनार से मरईगुड़ा तक सडक निर्माण का कार्य किया जा रहा था। निर्माण का ठेका नीरज सीमेंट स्ट्रक्चर लिमिटेड मुंबई को दिया गया था। निर्माण कार्य की माप पुस्तिका फर्जी तरीके से करोड़ों रुपए ज्यादा दर्शाए गए थे। कार्य से कहीं अधिक मूल्य का बिल बनवाया गया और करीब 2 करोड़ 84 लाख की राशि का अतिरिक्त आहरण कर ठेकेदार को भुगतान करवा दिया गया था। माप पुस्तिका में कूट रचना और आर्थिक आपराधिक षड्यंत्र के प्रमाण मिले है।

न्यायालयीन कार्यवाही
इस मामले में 5 सितंबर 2012 को प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इसके पश्चात 29 जुलाई 2019 को न्यायालय में अंतिम प्रतिवेदन (चार्जशीट) प्रस्तुत किया गया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा कुल 19 गवाहों के बयान न्यायालय में हुए। बयान और सक्ष्यों ने अभियुक्तों की संलिप्तता और षड्यंत्र को स्पष्ट कर दिया। विशेष न्यायालय ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोनों अभियुक्तों को दोषी पाकर सजा सुनाई है।

किन धाराओं के तहत हुई सजा ?
न्यायलय ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम धारा 13(2), भा.द.सं. की धारा 120, 420, 467, 468, 471 के तहत दोनों आरोपियों (चोवाराम पिस्दा और ज्ञानेश कुमार तारम) को सजा सुनाई है।

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