Vedant Samachar

क्या बच्चों में भी थायराइड हो सकता है? समझिए कारण, डाइट और बचाव से जुड़ी जानकारी

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जी हाँ, बच्चों में भी थायराइड हो सकता है. यह बीमारी सिर्फ बड़ों तक सीमित नहीं है. कई बच्चों को जन्म से ही थायराइड की समस्या हो सकती है, जिसे कॉनजेनिटल हाइपोथायरायडिज्म कहा जाता है. वहीं कुछ बच्चों में यह धीरे-धीरे विकसित होता है, खासतौर पर तब जब शरीर की रोग-प्रतिरोधक प्रणाली (इम्यून सिस्टम) गलती से खुद के ही थायराइड ग्लैंड पर हमला करने लगती है. इसे ऑटोइम्यून थायराइडिटिस या हाशिमोटो डिज़ीज़ कहा जाता है.

दिल्ली एम्स में पीडियाट्रिक विभाग में डॉ राकेश कुमार बागड़ी बताते हैं किबच्चों में थायराइड के होने के मुख्य कारणों में आयोडीन की कमी या अधिकता, पारिवारिक इतिहास, ऑटोइम्यून समस्याएं, कुछ विशेष दवाइयों का प्रभाव और रेडिएशन एक्सपोज़र शामिल हैं. इसके अलावा, कुछ बच्चों को थायराइड से जुड़ी समस्या जन्म के कुछ हफ्तों या महीनों में ही दिखने लगती है, जैसे सुस्ती, बढ़ोतरी में कमी, पीलापन या रोने में कमजोरी.

थायराइड के दो मुख्य प्रकार होते हैं-

हाइपोथायरायडिज्म, जिसमें थायराइड हार्मोन कम बनता है और हाइपरथायरायडिज्म, जिसमें यह हार्मोन ज़रूरत से ज़्यादा बनने लगता है. दोनों ही स्थितियों में लक्षण अलग-अलग होते हैं और अक्सर धीरे-धीरे सामने आते हैं, जिससे समय पर पहचान मुश्किल हो जाती है.

हाइपोथायरायडिज्म का संकेत (थायराइड हार्मोन कम)

इस स्थिति में बच्चे का वजन तेजी से बढ़ता है, भूख कम होती है. ठंड ज़्यादा लगती है, स्किन रूखी हो जाती है, बाल गिरने लगते हैं. बच्चा अक्सर कब्ज की शिकायत करता है. चेहरे पर हल्की सूजन, बच्चों में ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, पढ़ाई में मन न लगना और बोलने में धीमापन भी एक बड़ा संकेत हो सकता है. नवजात बच्चों में यह स्थिति और गंभीर होती है जैसे दूध पीने में परेशानी, रोने में कमजोरी और शरीर का सामान्य से कम एक्टिव होना.

हाइपरथायरायडिज्म का संकेत (हार्मोन का ज्यादा बनना)

अगर बच्चे में हाइपरथायरायडिज्म है, तो वह जरूरत से ज़्यादा एक्टिव दिख सकता है. उसका वजन अचानक घटने लगता है, जबकि भूख बहुत बढ़ जाती है. बच्चे का बार-बार पसीने से भीग जाना, नींद न आना, चिड़चिड़ा या गुस्सैल हो जाना, हाथ कांपना, दिल की धड़कन का बहुत तेज होना संकेत हैं. कुछ मामलों में आंखों की पुतलियां उभरी हुई लग सकती हैं. ये सब संकेत दिख रहे हैं तो थायराइड टेस्ट (TSH, T3, T4) कराना जरूरी होता है ताकि सही समय पर इलाज शुरू हो सके.

थायराइड में बच्चों को क्या खिलाएं (क्या खाएं):

– आयोडीन युक्त नमक क्योंकि थायराइड हार्मोन के लिए आयोडीन ज़रूरी होता है.

– दूध, दही, पनीर, अंडा इनमें कैल्शियम और प्रोटीन भरपूर होता है.

– हरी पत्तेदार सब्जियां, फल (सेब, केला, बेरीज़) इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं.

– नट्स और बीज (बादाम, सूरजमुखी के बीज) सेलेनियम और जिंक जैसे मिनरल्स से भरपूर होते हैं.

– धूप में कुछ समय बिताना जिससे शरीर को विटामिन D मिले, जो थायराइड के लिए जरूरी है.

थायराइड में बच्चों को क्या नहीं देना चाहिए (क्या न खाएं):

– कच्ची बंदगोभी, ब्रोकली, फूलगोभी इन्हें सीमित मात्रा में ही दें, खासकर हाइपोथायरायड में.

– बहुत ज्यादा सोया प्रोडक्ट्स थायराइड हार्मोन के अवशोषण को कम कर सकते हैं.

– जंक फूड और प्रोसेस्ड चीजें इनमें पोषण की कमी होती है और ये थायराइड को बिगाड़ सकते हैं.

– बहुत ज्यादा मीठा और कैफीन हार्मोन बैलेंस को खराब कर सकते हैं.

जांच कराएं

अगर बच्चे में थकान, ध्यान की कमी, वजन बढ़ना, धीमी ग्रोथ या बार-बार सुस्ती जैसे लक्षण नजर आएं, तो डॉक्टर से मिलकर थायराइड की जांच करानी चाहिए. सही समय पर इलाज और संतुलित आहार से थायराइड को नियंत्रण में रखा जा सकता है और बच्चे का सामान्य विकास बिना रुकावट के हो सकता है.

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