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तांबे के बर्तन में पीते हैं पानी… तो पहले जान लें सही तरीका, वरना हो जायेगा ये नुकसान

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Lifestyle: भारत में तांबे के बर्तन का उपयोग सदियों से किया जा रहा है और आयुर्वेद में इसे स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। तांबा शरीर के लिए एक आवश्यक धातु है जो कई प्रकार की बीमारियों से बचाव में मदद कर सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि तांबे के गिलास या बर्तन में पानी कितनी देर तक रखना चाहिए? अगर आप यह सोचते हैं कि तांबे के पानी का सेवन जितना ज्यादा होगा, उतना बेहतर होगा, तो यह आपकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। सही तरीके से तांबे के बर्तन में पानी रखना और उसे पीना अत्यंत महत्वपूर्ण है।


तांबे में पानी रखने का सही समय

आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार, तांबे के बर्तन में पानी को कम से कम 6 से 8 घंटे तक रखा जाना चाहिए, ताकि उसमें तांबे के आयन घुलकर पानी में मिल सकें। इसे “तांबा जल चिकित्सा” भी कहा जाता है। यह चिकित्सा सुबह खाली पेट पानी पीने की आदत पर आधारित है, जो शरीर को डिटॉक्सिफाई करता है और मेटाबोलिज्म को बढ़ाता है। इसके अलावा, तांबे का पानी पाचन तंत्र को मजबूत करने, लिवर और किडनी को डिटॉक्स करने, और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक होता है।

तांबे के पानी के फायदे

पाचन तंत्र को मजबूत करना: तांबा पानी पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाता है और खाना जल्दी पचता है।

वजन घटाने में मदद: यह वसा को तोड़ने में मदद करता है और मेटाबोलिज्म को तेज़ करता है।

त्वचा की देखभाल: तांबे के पानी में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे मुंहासे, दाग-धब्बे और संक्रमण से बचाव करते हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना: तांबा पानी शरीर के इन्फेक्शन को रोकने में सहायक होता है।

ज़्यादा तांबे का पानी पीना हो सकता है नुकसानदेह

हालांकि तांबे का पानी लाभकारी है, इसे बहुत ज़्यादा मात्रा में पीना हानिकारक हो सकता है। आयुर्वेद में कहा गया है कि दिन में एक या दो गिलास तांबा जल ही पर्याप्त है। अत्यधिक तांबे का सेवन शरीर में तांबे की विषाक्तता (Copper Toxicity) को बढ़ा सकता है, जिससे पेट दर्द, उल्टी, सिरदर्द, और लिवर या किडनी से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए, तांबे के बर्तन में सारा पानी न रखें और न ही बहुत अधिक पानी तांबे में डालें। एक गिलास तांबे का पानी सुबह या शाम को पीना सबसे उपयुक्त रहेगा।

-तांबे के बर्तन की सफाई और देखभाल

तांबे के बर्तन की सफाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। बर्तन को हमेशा साफ और सूखा रखें, क्योंकि गंदगी और ऑक्सीकरण तांबे के पानी की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। इसे समय-समय पर नींबू, नमक या सिरके से साफ़ करें, ताकि किसी प्रकार का अवशेष या घर्षण न हो। तांबे के बर्तन में खट्टे या अम्लीय पदार्थ जैसे नींबू पानी, इमली, लस्सी या जूस नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे तांबे का घुलाव बढ़ सकता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

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