शिमला,16जुलाई : हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से हो रही मूसलधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (HPSDMA) के अनुसार, प्रदेश में 257 सड़कें, 151 वितरण ट्रांसफार्मर (DTR) इकाइयाँ और 171 जलापूर्ति योजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
-मंडी और सिरमौर में हालात बेहद खराब
मंडी जिला सबसे ज़्यादा प्रभावित रहा, जहां 140 सड़कें और 143 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके साथ ही मंडी में 142 जलापूर्ति योजनाओं के ठप पड़ने से लाखों लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, सिरमौर ज़िले में 55 सड़कें बाधित हैं और नोहराधार क्षेत्र में 11 जलापूर्ति योजनाएं प्रभावित हुई हैं।
-कुल्लू में भीषण नुकसान, 35 सड़कें बंद
कुल्लू ज़िले के बंजार और निरमंड उपमंडलों में भारी वर्षा के कारण 35 प्रमुख सड़क मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं। थलोत क्षेत्र में दो ट्रांसफार्मर भी बंद हो गए हैं, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित हुई है।
-कांगड़ा, चंबा और सोलन में भी स्थिति चिंताजनक
कांगड़ा ज़िले के नगरोटा, शाहपुर, पालमपुर और जयसिंहपुर उपमंडलों में 12 सड़कें बंद हैं और नगरोटा में एक ट्रांसफारmer भी प्रभावित हुआ है। चंबा ज़िले के चंबा, तीसा और भरमौर उपमंडलों में पांच ट्रांसफार्मर बाधित हैं, जबकि दो सड़कें पूरी तरह बंद हैं। सोलन ज़िले में भी नालागढ़ उपमंडल सहित 10 सड़कें बंद हैं, और बड़साला पुल के क्षतिग्रस्त होने से बड़साला लिंक रोड अगले आदेश तक यातायात के लिए बंद रहेगा।
नूरपुर और ऊना में जलापूर्ति पर असर
नूरपुर उपमंडल में 18 जलापूर्ति योजनाएं प्रभावित हैं। ऊना ज़िले के अंब उपमंडल में तीन सड़कें अवरुद्ध हैं, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग-707 पर उतरी के पास हो रहे भूस्खलन के कारण यातायात ठप पड़ा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि यह मार्ग आज खोल दिया जाएगा।
-इन ज़िलों में हालात सामान्य
बिलासपुर, हमीरपुर, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और शिमला ज़िलों से फिलहाल किसी भी सड़क, ट्रांसफार्मर या जलापूर्ति योजना के प्रभावित होने की सूचना नहीं है।
प्रशासन सतर्क, बहाली कार्य जारी
स्थानीय प्रशासन, लोक निर्माण विभाग (PWD) और जलशक्ति विभाग ने आपात बहाली कार्य शुरू कर दिए हैं। जहां संभव है, वहां वैकल्पिक मार्गों से यातायात को मोड़ा जा रहा है और अस्थायी जलापूर्ति व्यवस्थाएं बहाल की जा रही हैं।
राज्य सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें, पहाड़ी क्षेत्रों में सतर्कता बरतें और प्रशासन द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों का पालन करें।



