Vedant Samachar

रायगढ़ : कोयले की भूख में जंगल की हत्या; जेपीएल का कारनामा बाकी है

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राधे श्याम शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता

दीपक शर्मा,रायगढ़,02 जुलाई (वेदांत सामाचार) I तमनार क्षेत्र में एक बार फिर विकास के नाम पर विनाश की पटकथा लिखी जा रही है। महाजेंको की जंगल कटाई पर अभी ग्रामीणों का गुस्सा थमा नहीं कि जिंदल पावर लिमिटेड (जेपीएल) ने गारे पेलमा सेक्टर 1 कोल ब्लॉक के नाम पर 3020 हेक्टेयर भूमि हथियाने की तैयारी कर ली है। इसमें से 120 हेक्टेयर भूमि घना जंगल है, जिसे सिर्फ मुनाफे के लिए मिटा दिया जाएगा।

ये पेड़ सिर्फ लकड़ी नहीं हैं, ये जीते-जागते देवता हैं। जिन पेड़ों को अब काटा जाएगा, वे वो हैं जिनकी छांव में पीढ़ियाँ पली हैं। साल, साजा, तेंदू, हर्रा, बीजा जैसे पेड़, जिनसे न सिर्फ वनवासी, बल्कि पूरा पारिस्थितिक तंत्र जीवित है। इन पेड़ों की जगह सीमेंट के खंभे खड़े किए जाएंगे। क्या ये जंगल केवल आंकड़ों की वस्तु बनकर रह जाएंगे?

जेपीएल का यह खनन प्रोजेक्ट 13 गांवों – बुडिया, रायपारा, बागबाड़ी, आमगांव, झिंकाबहाल, खुरुसलेंगा, धौराभाठा, बिजना, लिबरा, महलोई, तिलाईपारा, समकेरा और झरना – को सीधा प्रभावित कर रहा है। इन गांवों के निवासियों को उनकी ही जमीन से बेदखल किया जा रहा है। बिना ग्रामसभा की अनुमति, बिना सही मुआवजा, और बिना भविष्य की योजना के। यह सिर्फ ज़मीन का अधिग्रहण नहीं है, यह पहचान, संस्कृति और अस्तित्व का अपहरण है।

जेपीएल को यह खदान 50 वर्षों के लिए दी जा रही है। हर साल 1.5 करोड़ टन कोयले का लक्ष्य, यानी 50 सालों तक लगातार पेड़ों की बलि, ज़हर उगलते ट्रक, बस्तियों में धूल और बीमारी, और बच्चों की फेफड़ों में कालिख। नियमों की खुली हत्या और प्रशासन खामोश।

पेशा कानून की खुली अवहेलना हो रही है। ग्रामसभाओं की अनुमति नहीं ली गई है। जनसुनवाई की प्रक्रिया संदेहास्पद है। वन्यजीव, जलस्रोत, आदिवासी सब कुछ दांव पर है। कौन देगा जवाब? कौन रोकेगा ये अपराध?

अब गांव नहीं डरेगा: तमनार बोलेगा। ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। हर गांव में विरोध की चिंगारी धधक रही है। बुजुर्गों की आंखों में आँसू हैं और बच्चों की आवाज़ में गुस्सा है। जंगल नहीं बचेगा तो जीवन कैसे बचेगा? कोयले से हमारा भविष्य काला मत कीजिए। यह लड़ाई अब कोयले की नहीं, जीवन की है।

राधे श्याम शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता

हमारी लड़ाई आखिरी सांस तक जारी रहेगी: तमनार के लोगों का पूंजी के साम्राज्यवाद को ललकार

तमनार की धरती पर पूंजी के साम्राज्यवाद के खिलाफ एक नई लड़ाई शुरू हो गई है। जिंदल और अडानी जैसे कॉर्पोरेट घरानों को रायगढ़ की धरती से वापस जाने की चेतावनी दी गई है। सामाजिक कार्यकर्ता राधे श्याम शर्मा ने कहा, “हमारी लड़ाई आखिरी सांस तक जारी रहेगी। हम अपनी मां की छाती को कोयले से छलनी नहीं होने देंगे। रायगढ़ की धरती बिकाऊ नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “ये आवाज़ है खेत-खार की, ये चेतावनी है तमनार की। जिंदल हो या अडानी, रायगढ़ से वापस जाओ। हम अपने जंगल, अपने जलस्रोत, और अपनी जमीन की रक्षा करेंगे।” इस लड़ाई में तमनार के लोग एकजुट हो गए हैं। वे अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। यह लड़ाई न केवल तमनार की लड़ाई है, बल्कि यह पूरे रायगढ़ जिले की लड़ाई है।

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