Vedant Samachar

Breaking News : पूर्व मैनेजर की महिला मित्र से मिली थी 1.60 करोड़ की संपत्ति, ACB के आरोप-पत्र को दी चुनौती…

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बिलासपुर,30जून (वेदांत समाचार) : छत्तीसगढ़ मे नागरिक आपूर्ति निगम में हुए घोटाले के आरोपी पूर्व मैनेजर शिवशंकर भट्‌ट की महिला मित्र और ब्यूटी पार्लर संचालिका की याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। महिला ने ACB के केस दर्ज करने के बाद आरोप तय करने के खिलाफ आपराधिक पुनरीक्षण याचिका लगाई थी। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने माना है कि उसने नान के पूर्व मैनेजर की अवैध कमाई को निवेश करने का षडयंत्र किया है।

दरअसल, नागरिक आपूर्ति निगम में घोटाले की शिकायत पर एंटी करप्शन ब्यूरो और ईओडब्ल्यू ने नान के मुख्यालय समेत कई अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान पूर्व मैनेजर शिवशंकर भट्‌ट के आवास सहित अन्य ठिकानों पर भी दबिश दी थी। ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि भट्ट ने 3.89 करोड़ की अवैध संपत्ति जुटाई थी, जो उसकी वास्तविक आय से कई गुना अधिक थी। ईओडब्ल्यू की जांच में पता चला कि पूर्व मैनेजर शिवशंकर भट्ट की महिला मित्र मधुरिमा शुक्ला ब्यूटी पार्लर चलाती है। उसने उसकी अवैध कमाई को निवेश कर षडयंत्र किया है। लिहाजा, उसे भी सहआरोपी बनाया गया।

एसीबी ने जांच के दौरान मधुरिमा के पास से 1.60 करोड़ की संपत्ति बरामद किया। जबकि उसकी आय मात्र 24 लाख रुपए थी। इस मामले में चार्जशीट पेश होने के बाद स्पेशल कोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ई), 13(2) और आईपीसी की धारा 120-बी के तहत आरोप तय किए हैं। जिसके खिलाफ मधुरिमा ने हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। आरोपी महिला मधुरिमा ने हाईकोर्ट में प्रस्तुत अपनी याचिका में बताया कि उसे सुनियोजित तरीके से फंसाया गया है। उसके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह तथ्यहीन हैं। उसने ब्यूटी पार्लर के व्यवसाय से संपत्ति जुटाई है। उसने किसी तरह का अवैध काम नहीं किया है और न ही किसी के पैसे निवेश किए हैं।

इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एसीबी से दस्तावेज मंगाए। जिसके बाद दस्तावेजों का परीक्षण कराया गया। जिसकी जांच के बाद पाया कि मधुरिमा के पास 1.60 करोड़ रुपए की संपत्ति मिली। जबकि उसकी कुल वैध आय सिर्फ 24.74 लाख थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने माना कि उसने शिवशंकर भट्‌ट की अवैध कमाई को अपने नाम से निवेश कर षड्यंत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है। ऐसे में उसकी याचिका खारिज की जाती है।

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