Vedant Samachar

Air India Plane Crash : एयर इंडिया दुर्घटना के बाद UAE डॉक्टर की ₹6 करोड़ की सहायता जरूरतमंद परिवारों तक पहुंची

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नई दिल्ली,24जून : एयर इंडिया फ्लाइट 171 हादसे के बाद जब यहाँ के बीजे मेडिकल कॉलेज ने आज दोबारा कक्षाएं शुरू कीं, तो माहौल अब भी शोक से भरा हुआ था। इसी गमगीन पृष्ठभूमि में एक भावुक क्षण देखने को मिला, जब इस भयावह त्रासदी से प्रभावित परिवारों और घायलों तक पहली बार आर्थिक मदद पहुंची। कुल ₹6 करोड़ की यह राहत, यूएई के हेल्थकेयर उद्यमी और परोपकारी डॉ. शमशीर वायलिल द्वारा प्रदान की गई। दुर्घटना के कुछ ही दिनों बाद उन्होंने इस सहायता की घोषणा की थी।

अबू धाबी से वीपीएस हेल्थकेयर के प्रतिनिधि इस सहायता राशि को लेकर अहमदाबाद पहुंचे और इसे बीजे मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. मीनाक्षी पारिख के कार्यालय में एक निजी समारोह में प्रभावित परिवारों को सौंपा गया। इस दौरान अस्पताल अधीक्षक डॉ. राकेश एस. जोशी और जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के सदस्य भी उपस्थित रहे। पूरा कार्यक्रम गरिमापूर्ण और सादगीपूर्ण माहौल में आयोजित किया गया, जिसमें कॉलेज के नेतृत्व और छात्र समुदाय की भावनाएं स्पष्ट रूप से झलक रही थीं।

मिश्रित भावनाओं वाला दिन, लेकिन साथ खड़ा दिखा चिकित्सा समुदाय

इस सहायता राशि का पहला भाग उन चार मेडिकल छात्रों के परिवारों को प्रदान किया गया, जिन्होंने इस विमान हादसे में अपनी जान गंवाई। प्रत्येक परिवार को ₹1 करोड़ का चेक सौंपा गया। इनमें ग्वालियर (मध्य प्रदेश) के प्रथम वर्ष के एमबीबीएस छात्र आर्यन राजपूत, श्रीगंगानगर (राजस्थान) के मनव भाडू, बाड़मेर (राजस्थान) के जयप्रकाश चौधरी, और भावनगर (गुजरात) के राकेश गोबरभाई दियोरा के परिवार शामिल थे।

ये चारों छात्र अपने मेडिकल करियर की शुरुआत ही कर रहे थे, सपनों से भरे हुए थे, और उनके जीवन अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से समाप्त हो गए।

राकेश दियोरा के बड़े भाई विपुल भाई गोबरभाई दियोरा ने कहा, “वह हमारे पूरे परिवार की उम्मीद था। हमारे परिवार में वे पहले थे जिन्होंने मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया था। हम किसान पृष्ठभूमि से आते हैं। उन्हें बच्चों से बहुत प्यार था और वह चाइल्ड हार्ट सर्जन बनना चाहते थे। यह त्रासदी हमारे लिए झटका थी। हमारे घर में चार बहनें हैं और पिताजी की तबीयत भी ठीक नहीं रहती। वह ही सबकी आशा थे। यह मदद हमारे लिए बहुत मायने रखती है।” इन छात्रों के अलावा, छह अन्य मृतकों के परिजनों को भी सहायता दी गई। इनमें न्यूरोसर्जरी रेजिडेंट डॉ. प्रदीप सोलंकी (जिन्होंने अपनी पत्नी और साले को खोया); सर्जिकल ऑन्कोलॉजी रेजिडेंट डॉ. नीलकंठ सुथार (जिन्होंने अपने तीन परिजन गंवाए); और बीपीटी छात्र डॉ. योगेश हदत (जिन्होंने अपने भाई को खोया) शामिल हैं। इन सभी को प्रति मृतक सदस्य ₹25 लाख की सहायता दी गई।

घायलों को भी मिला सहारा

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन द्वारा डीन से परामर्श कर 14 गंभीर रूप से घायल लोगों की पहचान की गई, जिन्हें इस राहत राशि में शामिल किया गया। ये सभी ऐसे लोग थे जिन्हें जलने, फ्रैक्चर या आंतरिक चोटों जैसी गंभीर स्थिति में पाँच दिन या उससे अधिक समय अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा था। प्रत्येक को ₹3.5 लाख की सहायता दी गई। इनमें सिर, गर्दन और अंगों में गंभीर चोटें झेल रहे प्रथम व द्वितीय वर्ष के एमबीबीएस छात्र, गंभीर रूप से जले हुए डॉ. केल्विन गमेती और डॉ. प्रथम कोलचा जैसे रेजिडेंट्स, और संकाय सदस्यों के रिश्तेदार जैसे मनीषा बेन और उनके आठ महीने के बेटे शामिल हैं, जिनका इलाज अब भी जारी है।

कुछ ही दिनों में पूरा किया गया संकल्प

यह ₹6 करोड़ की सहायता 17 जून को किए गए डॉ. शमशीर वायलिल के वादे को पूरा करती है। डॉ. शमशीर ने उस दुर्घटना के कुछ ही दिन बाद यह वादा किया था जिसने अतुल्यम हॉस्टल परिसर को झकझोर कर रख दिया था। उस समय, डॉ. शमशीर ने एक व्यक्तिगत पत्र में लिखा था: “आपके प्रियजनों के जो सपने थे, वे हम सभी के साझा सपने थे, जो चिकित्सा सेवा को अपना जीवन मानते हैं। कृपया जानिए कि आप अकेले नहीं हैं। संपूर्ण चिकित्सा समुदाय आपके साथ खड़ा है।” सहायता राशि के वितरण के बाद, मृतकों की स्मृति में एक विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। संकाय, छात्र और स्टाफ मौन में एकत्रित हुए।

कई लोगों के लिए यह हादसे के बाद पहली बार कॉलेज लौटना था। कॉलेज की डीन डॉ. मीनाक्षी पारिख ने कहा, “हम अब भी इस अपूरणीय क्षति को स्वीकारने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे समय में एकजुटता के ये छोटे-छोटे कदम हमें याद दिलाते हैं कि चिकित्सा समुदाय दुख की घड़ी में भी एक साथ खड़ा होता है।” जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन की ओर से डॉ. शेखर पारघी ने कहा, “हमने अपने दोस्त खोए हैं। यह दर्द असली है। जो डॉ. शमशीर ने किया, वह हमारे लिए बहुत मायने रखता है। ऐसा लगा कि कोई ऐसा व्यक्ति, जो हमारी परिस्थितियों को समझता है, उसने उस समय साथ दिया जब उसकी सबसे ज्यादा ज़रूरत थी।”

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