मुंबई,14जून 2025 : फ्रांस के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित ला क्रो शहर में इस साल का पहला स्थानीय स्तर पर फैला चिकनगुनिया वायरस का मामला सामने आया है। यह पुष्टि देश की क्षेत्रीय स्वास्थ्य एजेंसी ARS (एआरएस) ने की है। यह मामला विशेष रूप से चिंता का विषय है क्योंकि मरीज की हालिया किसी संक्रमित देश की यात्रा नहीं हुई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि चिकनगुनिया फैलाने वाले संक्रमित मच्छर अब फ्रांस के कुछ हिस्सों में सक्रिय हो सकते हैं।
स्थानीय संक्रमण का अर्थ और सावधानी
एआरएस के अनुसार, किसी भी मामले को “स्थानीय संक्रमण” तब माना जाता है जब मरीज ने लक्षण शुरू होने से 15 दिन पहले किसी अन्य देश की यात्रा न की हो। यह दर्शाता है कि वायरस देश के भीतर ही फैला है। मामले की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य अधिकारियों ने क्षेत्र में घर-घर सर्वे शुरू कर दिया है ताकि अन्य संभावित मामलों का पता लगाया जा सके और संक्रमण की कड़ी को तोड़ा जा सके।
उपाय और सावधानियां
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कीटनाशक छिड़काव, मच्छरनाशक वितरण और जनजागरूकता अभियान जैसे जरूरी उपाय किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों को सलाह दी गई है कि वे मच्छरों से बचाव के लिए लंबी बाजू के कपड़े पहनें, मच्छरदानी का प्रयोग करें और घर के आसपास पानी इकट्ठा न होने दें।
ला रियूनियन में गंभीर स्थिति
फ्रांस के अधीन ला रियूनियन द्वीप में चिकनगुनिया का व्यापक प्रकोप पहले से ही चिंता का विषय बना हुआ है। वर्ष 2025 की शुरुआत से अब तक वहां 50 हजार से अधिक संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं, और 20 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। यह आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि वायरस कितनी तेजी से फैल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलर्ट
अमेरिका की रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (CDC) ने भी हाल ही में चिकनगुनिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए यात्रा परामर्श जारी किया है। इसमें केन्या, श्रीलंका, मेडागास्कर, रीयूनियन और अन्य देशों का उल्लेख किया गया है। CDC ने ऐसे क्षेत्रों की यात्रा करने वालों से वैक्सीन लगवाने और मच्छरों से बचाव के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की सिफारिश की है।
क्या है चिकनगुनिया
चिकनगुनिया एक वायरल रोग है जो एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज़ बुखार, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, थकावट, सिरदर्द और त्वचा पर चकत्ते शामिल हैं। हालांकि यह आमतौर पर जानलेवा नहीं होता, लेकिन इसकी वजह से लंबे समय तक जोड़ों में दर्द रह सकता है।



