Vedant Samachar

‘चक्रवर्ती सम्राट पृथ्वीराज चौहान’ में राजमाता की भूमिका पर पद्मिनी कोल्हापुरे ने कहा- ” मैंने इतनी रिसर्च की है कि अब मेरा फोन केवल पृथ्वीराज और उस युग से जुड़ी सामग्री ही सुझाता है”

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मुंबई, 3 जून, 2025: सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न अपने दर्शकों के लिए एक भव्य ऐतिहासिक गाथा लेकर आ रहा है, ‘चक्रवर्ती सम्राट पृथ्वीराज चौहान’, जिसका प्रसारण 4 जून से हर सोमवार से शुक्रवार, रात 7:30 बजे किया जाएगा। यह महागाथा पृथ्वीराज चौहान की ‘एक मासूम राजकुमार से भारत के सबसे बहादुर सम्राटों में से एक बनने तक की’ प्रेरणादायक यात्रा को दर्शाती है। कम उम्र में ही राजा बने पृथ्वीराज अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए समर्पण और अदम्य साहस के लिए पहचान रखते हैं। आज भी इतिहास के सबसे कुख्यात आक्रमणकारी मुहम्मद गोरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच लड़ी गई ऐतिहासिक लड़ाई लोगों के गर्व का विषय बनी हुई है। एक योद्धा के रूप में पृथ्वीराज के पास केवल हथियार ही नहीं, बल्कि बुद्धिमत्ता और दूरदर्शिता भी थी। पृथ्वीराज को कर्तव्य, करुणा और मातृभूमि और उसमें रहने वाले लोगों के प्रति अटूट समर्पण से प्रेरित व्यक्तित्व के रूप में परभाषित किया जाता है।
इस ऐतिहासिक गाथा में दिग्गज अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे राजसी राजमाता की भूमिका में दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने के लिए तैयार हैं। इस प्रतिष्ठित किरदार को जीवंत करने के लिए पद्मिनी ने गहन शोध किया और खुद को उस समय की ऐतिहासिक व भावनात्मक भावना में पूरी तरह उतार दिया। पद्मिनी कोल्हापुरे ने प्राचीन ग्रंथों, लोक कथाओं और विद्वानों के लेखों का अध्ययन कर उस रानी, माँ और रणनीतिकार की जटिल छवि को समझा, जो पृथ्वीराज चौहान की विरासत गढ़ने में एक प्रमुख स्तंभ रहीं।


अपने किरदार को लेकर बात करते हुए पद्मिनी कोल्हापुरे ने कहा, “चक्रवर्ती सम्राट पृथ्वीराज चौहान में राजमाता की भूमिका निभाना मेरे करियर के सबसे अर्थपूर्ण अनुभवों में से एक रहा है। वे केवल एक ऐतिहासिक चरित्र नहीं हैं, वे एक माँ हैं, एक मार्गदर्शक हैं, और भारत के सबसे महान योद्धाओं में से एक के पीछे एक सशक्त स्त्री हैं। उन्हें समझने के लिए मैंने केवल स्क्रिप्ट पर निर्भर नहीं किया। मैंने ऐतिहासिक दस्तावेज पढ़े, लोक कथाएँ सुनीं, शोध लेख पढ़े और क्षेत्रीय डॉक्यूमेंट्रीज़ भी देखीं, ताकि यह जान सकूँ कि वे किस प्रकार का आचरण करती होंगी। दिलचस्प बात यह है कि अब मेरा फोन केवल पृथ्वीराज और उस युग से जुड़ी सामग्री ही सुझाता है, मैंने उन पर इतनी रिसर्च की है। उनके भीतर की मौन शक्ति मुझे बहुत प्रभावित करती है। वे शायद युद्धभूमि पर नहीं थीं, लेकिन उनकी भूमिका उतनी ही महत्वपूर्ण थी। एक माँ होने के नाते, मैं उनके भावनात्मक संघर्ष से खुद को जोड़ पाई, कठिन समय में अपने आप को संयमित रखना कितना चुनौतीपूर्ण रहा होगा। यह भूमिका निभाना एक बड़ी जिम्मेदारी है, और मैंने कोशिश की है कि हर हावभाव और हर क्षण में उनके सफर की सच्चाई झलकती रहे।”
इस महान गाथा का साक्षी बनिए 4 जून से हर सोमवार से शुक्रवार, रात 7:30 बजे, केवल सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न और सोनी लिव पर

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