बीजापुर/रायपुर, 6 जुलाई (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ सरकार ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर सृजित करने तथा किसानों और तसर पालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से रेशम उत्पादन को लगातार प्रोत्साहित कर रही है। इसी कड़ी में बीजापुर जिले के कोसा बीज केंद्र, मोदकपाल में रेशम विभाग द्वारा तसर पालन को बढ़ावा देने के लिए हितग्राहियों के बीच 5,700 तसर स्वस्थ डिम्ब समूहों का वितरण किया गया। राज्य शासन की अनुदान आधारित इस योजना के तहत हितग्राहियों को कम लागत पर गुणवत्तायुक्त तसर बीज उपलब्ध कराया गया, जिससे तसर उत्पादन में वृद्धि के साथ ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।
रेशम विभाग के अनुसार वितरित किए गए 5,700 तसर स्वस्थ डिम्ब समूहों की कुल लागत 91,200 रुपये है। इसमें राज्य शासन की ओर से 79,800 रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई, जबकि हितग्राहियों को केवल 11,400 रुपये का अंशदान देना पड़ा। सरकार की इस पहल से तसर पालकों को बेहद कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले स्वस्थ डिम्ब समूह उपलब्ध हुए हैं, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ने की संभावना है।
विभाग का कहना है कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वरोजगार से जोड़ना और उनकी आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है। गुणवत्तायुक्त तसर बीज उपलब्ध कराने के साथ-साथ विभाग हितग्राहियों को वैज्ञानिक तरीके से तसर पालन के लिए आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण भी उपलब्ध करा रहा है। इससे हितग्राही आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर बेहतर उत्पादन हासिल कर सकेंगे।
रेशम विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार वितरित किए गए स्वस्थ डिम्ब समूहों से लगभग 2 लाख कोसों का उत्पादन होने का अनुमान है। इससे न केवल लाभार्थियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, बल्कि बीजापुर जिले में तसर उत्पादन को भी नई गति मिलेगी। विभाग का मानना है कि गुणवत्तायुक्त बीज और वैज्ञानिक पद्धति से तसर पालन करने पर उत्पादन में सुधार के साथ किसानों और तसर पालकों को बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त होगा।

विभाग ने बताया कि राज्य शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से तसर पालन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हितग्राहियों को कम लागत पर बीज उपलब्ध कराने के साथ ही प्रशिक्षण, तकनीकी सलाह और समय-समय पर आवश्यक सहयोग भी दिया जाएगा, ताकि ग्रामीण परिवार आत्मनिर्भर बन सकें और तसर पालन को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि बीजापुर जैसे वनांचल क्षेत्रों में तसर पालन रोजगार और आय का प्रभावी माध्यम बन सकता है। ऐसे क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता तसर उत्पादन के लिए अनुकूल है। सरकार की सब्सिडी और तकनीकी सहयोग से अधिक से अधिक लोग इस व्यवसाय से जुड़ेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

