नई दिल्ली,02 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट विस्तार 5 जुलाई या 11 जुलाई के बाद किसी भी समय हो सकता है। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
माना जा रहा है कि इस बार मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए सरकार आगामी विधानसभा चुनावों, महिला आरक्षण, सामाजिक प्रतिनिधित्व और ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को ध्यान में रखते हुए नई टीम तैयार कर सकती है। चर्चा है कि युवा सांसदों, महिलाओं और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के नेताओं को पहले से अधिक प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई मौकों पर युवाओं को देश की सबसे बड़ी ताकत बता चुके हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार कैबिनेट में अपेक्षाकृत युवा सांसदों को शामिल कर नई पीढ़ी को नेतृत्व में आगे लाने का संदेश दिया जा सकता है। मौजूदा लोकसभा में बड़ी संख्या में युवा सांसद मौजूद हैं और सरकार उन्हें संगठन के साथ-साथ सरकार में भी बड़ी भूमिका दे सकती है।
पिछले कुछ वर्षों में मोदी सरकार के मंत्रिमंडल की औसत आयु लगातार कम हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार भी युवा चेहरों को प्राथमिकता मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
महिला आरक्षण कानून को लेकर लगातार चर्चा के बीच इस बार मंत्रिमंडल में महिलाओं की संख्या बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। वर्तमान में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में सात महिला मंत्री हैं। माना जा रहा है कि सरकार नए महिला चेहरों को शामिल कर महिला सशक्तिकरण का बड़ा संदेश देने की कोशिश कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार भविष्य में महिला आरक्षण को प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ती है, तो उससे पहले मंत्रिमंडल में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी उत्तर प्रदेश, पंजाब समेत कई राज्यों के विधानसभा चुनावों को देखते हुए OBC और अनुसूचित जाति (SC) समुदाय के नेताओं को भी मंत्रिमंडल में अधिक प्रतिनिधित्व मिल सकता है। भाजपा लंबे समय से सामाजिक संतुलन और व्यापक प्रतिनिधित्व की रणनीति पर काम करती रही है।
विपक्ष की ओर से जातिगत जनगणना और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद सरकार भी इन वर्गों को मजबूत संदेश देने की कोशिश कर सकती है। ऐसे में नए मंत्रिमंडल में सामाजिक समीकरणों का विशेष ध्यान रखा जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में केवल नए चेहरों को ही जगह नहीं मिलेगी, बल्कि कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में फेरबदल भी किया जा सकता है। प्रदर्शन के आधार पर कुछ मंत्रियों की जिम्मेदारियां बदली जा सकती हैं, जबकि कुछ नए सांसदों को पहली बार मंत्री बनने का मौका मिल सकता है।
फिलहाल मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे लेकर अटकलों का दौर जारी है। अब सभी की नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले फैसले और संभावित नई टीम पर टिकी हुई है।

