0.हाथ से मसलने पर निकल रहा डामर, ग्रामीण बोले—मुरुम पर ही बिछा दी सड़क; विभाग ने कहा—स्टेट टीम कर चुकी 19 मार्च को जांच में संतुष्ट
कोंडागांव, 28 मार्च (वेदांत समाचार )। नक्सल मुक्त होने के बाद विकास की उम्मीदों से भरे अंदरूनी गांवों में अब सड़कों की गुणवत्ता ही सवालों के घेरे में है। जिले के अंतिम छोर पर बसे ग्राम कुदुर से तुमड़ीवाल तक प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाय) के तहत करीब 3 करोड़ रुपए की लागत से बनी डामरीकृत सड़क महज एक महीने में ही उखड़ने लगी है। सड़क की हालत देखकर ग्रामीणों में आक्रोश है और वे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क में इस्तेमाल किया गया डामर बेहद घटिया है। स्थिति यह है कि सड़क की परत हाथ और पैर से मसलने पर ही निकल रही है। उनका कहना है कि निर्माण के दौरान मानकों की अनदेखी की गई। डामर बिछाने से पहले जरूरी गिट्टी (मेटल) नहीं डाली गई और सीधे मुरुम पर ही डामर बिछा दिया गया, जिससे सड़क कमजोर बन गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही भी सीमित है, इसके बावजूद सड़क का इतनी जल्दी खराब होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। ग्रामीणों ने निर्माण एजेंसी और ठेकेदार धर्मेंद्र मिश्रा पर घटिया सामग्री उपयोग करने का आरोप लगाया है।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि कोंडागांव जिला भले ही नक्सल मुक्त हो गया हो, लेकिन भ्रष्टाचार से अब भी मुक्ति नहीं मिल पाई है। पहले नक्सल प्रभावित क्षेत्र का हवाला देकर निरीक्षण में ढिलाई बरती जाती थी, जिसका फायदा उठाकर अब भी निम्न स्तर का निर्माण किया जा रहा है। लोगों को आशंका है कि ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसे कार्य किए जा रहे हैं। करीब 4 से 4.5 किलोमीटर लंबी यह सड़क अब जगह-जगह पपड़ी की तरह उखड़ रही है, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विभाग का पक्षपीएमजीएसवाय के कार्यपालन अभियंता बलराम ठाकुर ने बताया कि कुदुर से तुमड़ीवाल मार्ग का सर्वे वर्ष 2016-17 में किया गया था, लेकिन नक्सल प्रभाव के कारण कार्य शुरू नहीं हो सका था। हाल ही में प्रशासन के सहयोग से सड़क का निर्माण कराया गया है। उन्होंने बताया कि इस सड़क की जांच 19 मार्च को राज्य स्तरीय टीम द्वारा की जा चुकी है और टीम ने कार्य पर संतोष जताया है। उनका कहना है कि नई सड़क को पूरी तरह सेट होने में समय लगता है।
