नई दिल्ली,26 मार्च। वैश्विक स्तर पर बढ़ते संघर्ष और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के बीच भारत ने अपने नए ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (NDC) लक्ष्यों के जरिए जलवायु प्रतिबद्धताओं को लेकर मजबूत संदेश दिया है। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) के सीईओ डॉ. अरुणाभा घोष ने इन लक्ष्यों को भारत की दूरदर्शी रणनीति बताया है।
डॉ. घोष के अनुसार, वर्ष 2035 तक देश की कुल बिजली क्षमता में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी गैर-जीवाश्म ईंधन से हासिल करने का लक्ष्य इस बात का संकेत है कि भारत ऊर्जा क्षेत्र को कार्बन मुक्त करने के साथ-साथ ऊर्जा को सुलभ और किफायती बनाए रखने पर भी ध्यान दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का बिजली बाजार तेजी से विकसित हो रहा है और यदि यही रफ्तार बनी रही तो देश अपने तय लक्ष्यों से आगे निकल सकता है।
उन्होंने उत्सर्जन तीव्रता (Emission Intensity) को 47 प्रतिशत तक कम करने के लक्ष्य को भी महत्वपूर्ण बताया। इसके साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन, कार्बन कैप्चर, उन्नत बैटरी और दुर्लभ खनिज जैसे क्षेत्रों में नवाचार को ऊर्जा संक्रमण की दिशा में अहम बताया गया है।
डॉ. घोष ने कहा कि भारत कार्बन सिंक बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है, जिससे कृषि-वानिकी, मृदा स्वास्थ्य और जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में निवेश के नए अवसर खुलेंगे। वहीं, जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों—जैसे अनियमित वर्षा, हीटवेव और तटीय जोखिम—से निपटने के लिए लचीले बुनियादी ढांचे और अनुकूलन उपायों को प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने मैंग्रोव पुनर्बहाली, चक्रवात के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और राज्यों में ‘हीट एक्शन प्लान’ जैसे कदमों को भारत की जलवायु रणनीति के प्रमुख स्तंभ बताया। साथ ही ‘मिशन लाइफ’ के जरिए सतत जीवनशैली और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
डॉ. घोष के मुताबिक, भारत अब ‘हरित अर्थव्यवस्था’ के मॉडल को अपनाते हुए जलवायु कार्रवाई को विकास और आर्थिक रणनीति के साथ जोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं पर मजबूती से कायम है और संतुलित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है।
