Vedant Samachar

जिले के 437 जर्जर स्कूल भवनों में से 113 को मंजूरी, 94 में अब तक काम शुरू नहीं

Vedant samachar
3 Min Read

कोरबा, 26 मार्च (वेदांत समाचार)। जिले में स्कूलों की जर्जर स्थिति को सुधारने की प्रशासनिक कवायद अभी भी जमीन पर असर नहीं दिखा पा रही है। नए शिक्षा सत्र की शुरुआत 1 अप्रैल से होने जा रही है, लेकिन बड़ी संख्या में स्कूल भवन अब भी खस्ताहाल बने हुए हैं, जिससे विद्यार्थियों की सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है।

जिले में कुल 437 स्कूल भवन ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें मरम्मत या पुनर्निर्माण की आवश्यकता है। इनमें से 113 प्राइमरी और मिडिल स्कूल भवनों को गिराकर नए निर्माण की मंजूरी करीब तीन महीने पहले दी गई थी।

हालांकि वर्तमान स्थिति चिंताजनक है—इनमें से केवल 19 स्कूलों में ही तेजी से निर्माण कार्य जारी है, जबकि 94 स्कूलों में अब तक काम शुरू ही नहीं हो सका है। मजबूरी में इन जर्जर भवनों में ही कक्षाएं संचालित की जा रही हैं, जो बच्चों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है।

नए सत्र में छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद थी, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए यह संभव होता नहीं दिख रहा है। 30 अप्रैल से ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू होगा और 16 जून से स्कूल पुनः खुलेंगे। ऐसे में यह समय निर्माण कार्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कटघोरा ब्लॉक के गवर्नमेंट गर्ल्स प्रायमरी स्कूल छुरी और बालक प्रायमरी स्कूल भाठापारा छुरी के भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। नए भवन की मंजूरी के बावजूद अब तक पुराने खंडहरनुमा ढांचे ही खड़े हैं।

करतला ब्लॉक के गवर्नमेंट प्रायमरी एवं मिडिल स्कूल केरवाद्वारी में छत और दीवारों से पानी टपकता है। बारिश में कमरों में पानी भर जाता है, फिर भी यहां कक्षाएं लग रही हैं।

पाली ब्लॉक के कोरबी क्षेत्र के आश्रित मोहल्ले में संचालित प्रायमरी स्कूल में बच्चों को जर्जर भवन में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। छत का प्लास्टर गिर चुका है और सरिया तक नजर आ रही है। बारिश के समय छुट्टी देना मजबूरी बन जाता है।

जिला शिक्षा अधिकारी टी.पी. उपाध्याय ने बताया कि जर्जर और मरम्मत योग्य स्कूल भवनों की सूची प्रशासन को सौंप दी गई है। कुछ स्कूलों में कार्य शुरू हो चुका है, जबकि बाकी की जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान स्कूलों की स्थिति सुधारने का प्रयास किया जाएगा, ताकि नए सत्र में बच्चों को बेहतर और सुरक्षित वातावरण मिल सके।


Share This Article