Vedant Samachar

कोरबा में बिजली का ‘पावर कट’ गेम: 45°C वाली गर्मी और दिन में 5 बार ट्रिपिंग, जनता बेहाल!

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​कोरबा,24 मार्च (वेदांत समाचार) | 24 मार्च 2026क्या आप भी कोरबा में रहते हैं और हर एक घंटे में ‘बत्ती गुल’ होने से परेशान हैं? अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं। ऊर्जाधानी कहे जाने वाले कोरबा में इन दिनों बिजली व्यवस्था खुद ‘वेंटिलेटर’ पर नजर आ रही है। रोजाना 4 से 5 बार हो रही अघोषित कटौती और ट्रिपिंग ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।

​डिमांड बढ़ी पर सिस्टम हुआ ‘सरेंडर’

​गर्मी की दस्तक के साथ ही शहर में बिजली की डिमांड 35 मेगावाट से उछलकर 45 मेगावाट तक जा पहुंची है। लोड क्या बढ़ा, सिस्टम के पुराने तारों ने जवाब देना शुरू कर दिया। आलम यह है कि फीडर कंडक्टर पर दबाव बढ़ते ही तार टूट रहे हैं और पूरा इलाका घंटों अंधेरे में डूब जाता है।

​110 करोड़ का बजट, फिर भी काम ‘जीरो’?

​हैरानी की बात तो यह है कि केंद्र सरकार की RDSS योजना के तहत कोरबा के लिए 110 करोड़ रुपए स्वीकृत हैं। इस भारी-भरकम बजट से नए खंभे, केबल और ट्रांसफार्मर लगने थे। लेकिन हकीकत यह है: ​2 साल बीत गए, पर शहरी इलाकों में काम शुरू तक नहीं हुआ।
​25 साल पुराने जर्जर कंडक्टरों के भरोसे 2026 की बिजली सप्लाई चल रही है। नेहरू नगर और आजाद नगर जैसे स्लम इलाकों में तारों का ‘मकड़जाल’ हादसों को न्योता दे रहा है। “शहर के 72 में से 20 फीडर पूरी तरह जवाब दे चुके हैं। जब तक पुराने कंडक्टर नहीं बदलेंगे, ट्रिपिंग से निजात मिलना नामुमकिन है।” — विशेषज्ञ राय

​भारी वाहन और खुले ट्रांसफार्मर: खतरे की घंटी

​शहर में 2400 ट्रांसफार्मर लगे हैं, जिनमें से ज्यादातर असुरक्षित और खुले में हैं। ऊपर से सड़कों के किनारे लगे खंभों को भारी वाहन आए दिन टक्कर मारकर तोड़ रहे हैं। नतीजा? घंटों की बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या।

​क्या कहते हैं जिम्मेदार?

​रोशन वर्मा (कार्यपालन अभियंता): “सुधार का प्रस्ताव भेजा जा चुका है, कोशिशें जारी हैं।”
​एच.एस. राठौर (प्रभारी ईई): “जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी और काम में तेजी लाई जाएगी।”

​जब बजट पास है और गर्मी सिर पर है, तो प्रशासन ‘टेंडर-टेंडर’ खेलने के बजाय काम कब शुरू करेगा? क्या कोरबा की जनता को इस साल भी बिना बिजली के पसीने में तरबतर होना पड़ेगा?

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